किसी भी तीर्थ स्थान पर मिलने वाले प्रसाद को सामान्यतया प्रसाद ही कहा जाता है, परंतु उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर में मिलने वाले प्रसाद को 'महाप्रसाद' माना जाता है। जगन्नाथ मंदिर एकमात्र ऐसा स्थान है जिसके प्रसाद को महाप्रसाद कहा जाता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ा रहस्य...
बताया जाता है कि एक बार महाप्रभु वल्लभाचार्य एकादशी व्रत के दिन जगन्नाथ मंदिर पहुंचे। तब भगवान जी ने उनकी निष्ठा की परीक्षा लेने का सोचा। व्रत के दिन वहां वल्लभाचार्य को किसी ने प्रसाद दिया।
वल्लभाचार्य ने वो प्रसाद और उन्होंने स्तवन करते हुए दिन के बाद रात भी बिता दी। अगले दिन द्वादशी को स्तवन समाप्त होने पर उन्होंने प्रसाद को ग्रहण किया। जिसके बाद 'प्रसाद' को 'महाप्रसाद' का गौरव प्राप्त हुआ।
आपको बता दें, जगन्नाथ मंदिर में भोग बनाने के लिए करीबन 500 रसोइए और उनके 300 सहयोगी काम करते हैं। बताया जाता है कि रसोई में जो भी भोग तैयार किया जाता है वह सब मां लक्ष्मी की देखरेख में होता है।
भोग के लिए रोजाना 56 तरह के भोग तैयार किये जाते हैं। ये सारे व्यंजन मिट्टी के बर्तनों में तैयार किये जाते हैं। यह महाप्रसाद आनंद बाजार में मिलता है, जो विश्वनाथ मंदिर के पांच सीढ़ियां चढ़ने पर आता है।