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सर्वपितृ अमावस्या: आज पितरों की विदाई का आखिरी दिन, जानें श्राद्ध का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और दान का महत्व

Sat, 10 Oct 2026 07:56 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 10 Oct 2026 07:56 AM IST
सार

सर्वपितृ अमावस्या 2026 आज 10 अक्तूबर को मनाई जा रही है। इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं श्राद्ध का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, जरूरी नियम और दान का महत्व।

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Sarva Pitru Amavasya 2026 Know the Exact Shradh Muhurat, Puja Vidhi, Rules and Daan
sarvapitru amavasya - फोटो : amar ujala

Sarva Pitru Amavasya 2026: सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या पितृ पक्ष के दौरान किसी कारणवश श्राद्ध नहीं कर पाए हों, वे इस दिन श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। इसे महालय अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या की तिथि, श्राद्ध का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, जरूरी नियम और दान का महत्व।

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Sarva Pitru Amavasya 2026 Know the Exact Shradh Muhurat, Puja Vidhi, Rules and Daan
सर्वपितृ अमावस्या - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्तूबर 2026, शनिवार को मनाई जा रही है। इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन हो रहा है। इस दिन पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य किया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान प्रत्येक तिथि पर अलग-अलग पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। हालांकि, जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अलावा, पितृ पक्ष में छूट गए श्राद्ध कर्म भी इस दिन किए जा सकते हैं।

Sarva Pitru Amavasya 2026 Know the Exact Shradh Muhurat, Puja Vidhi, Rules and Daan
सर्वपितृ अमावस्या 2026 - फोटो : AI

सर्वपितृ अमावस्या 2026 का शुभ मुहूर्त

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण के लिए दिन के निर्धारित समय को महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 10 अक्तूबर को श्राद्ध कर्म के लिए ये मुहूर्त बताए गए हैं।

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक

  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:41 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक

  • अपराह्न काल: दोपहर 1:28 बजे से दोपहर 3:49 बजे तक

सर्वपितृ अमावस्या तिथि का समय

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 9 अक्तूबर 2026 को रात 9:35 बजे

  • अमावस्या तिथि समाप्त: 10 अक्तूबर 2026 को रात 9:19 बजे

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सर्वपितृ अमावस्या 2026 - फोटो : AI

सर्वपितृ अमावस्या पर कैसे करें श्राद्ध और तर्पण?

1. स्नान और सूर्य को अर्घ्य दें: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और अपने पूर्वजों का स्मरण करें।

2. तर्पण की तैयारी करें: तांबे के पात्र में जल लें। परंपरा के अनुसार इसमें काले तिल, कुश और अन्य आवश्यक सामग्री रखी जा सकती है। इसके बाद पितरों का ध्यान करते हुए विधिपूर्वक तर्पण करें।

3. पितरों के निमित्त जल अर्पित करें: दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित माना जाता है। इसलिए पारंपरिक विधि के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जाता है। विधि के दौरान परिवार की परंपरा और पुरोहित के निर्देशों का पालन करें।

4. पिंडदान करें: श्राद्ध परंपरा में पके हुए चावल, तिल और अन्य निर्धारित सामग्री से पिंड तैयार किए जाते हैं। इसके बाद पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किया जाता है।

5. ब्राह्मण भोजन और सेवा करें: अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी पुण्यकारी माना जाता है।

6. पशु-पक्षियों के लिए भोजन निकालें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भोजन निकालने की परंपरा है। इसे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है।7. क्षमा प्रार्थना करें: पूजा और श्राद्ध कर्म के अंत में अपने पूर्वजों का स्मरण करें और जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार की सुख-शांति की कामना करें।

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सर्वपितृ अमावस्या - फोटो : freepik

सर्वपितृ अमावस्या पर किन बातों का रखें ध्यान?

  • श्राद्ध और तर्पण श्रद्धापूर्वक करें तथा पूजा में जल्दबाजी से बचें।
  • परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित विधि का पालन करें।
  • किसी जरूरतमंद, बुजुर्ग या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें।
  • घर में अनावश्यक विवाद और कटु वचन बोलने से बचें।
  • धार्मिक परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें। दिखावे या आर्थिक दबाव में आकर दान करने की आवश्यकता नहीं है।
  • यदि श्राद्ध की विधि को लेकर कोई संशय हो, तो जानकार पुरोहित से परामर्श लें।
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