हिंदी पंचाग का नया महीना कार्तिक शुरू हो चुका है। यह महीना सबसे पवित्र माना जाता है। कार्तिक महीना भगवान विष्णु का महीना है। इसी महीने में करीब चार महीनों के विश्राम के बाद देवउठनी एकादशी के दिन वे जागेंगे और एक बार फिर सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी अपने हाथों लेंगे। कार्तिक महीने में स्नान और दीपदान करने की परंपरा होती है। इस महीने दीपावली और छठ जैसे कई बड़े त्योहार मनाए जाएंगे। आइए जानते हैं कार्तिक महीने में कौन-कौन से और किस तारीख को विशेष त्योहार आएंगे।
स्नान और दीपदान का महीना है कार्तिक, जानिए इस माह के प्रमुख व्रत-त्योहार
करवा चौथ
17 अक्टूबर
कार्तिक महीने के बड़े त्योहार के रूप में करवा चौथ पहला पर्व होगा। करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व होता है। इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु और सौभाग्य के कामना के लिए करवा चौथ माता, भगवान शंकर और माता पार्वती की विशेष पूजा करती है। इस वे पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। रात को चांद के दर्शन और उन्हें अर्ध्य देकर जल ग्रहण करती हैं।
करवा चौथ शुभ मुहूर्त
17:50:03 से 18:58:47 तक
करवा चौथ चंद्रोदय समय
20:15:59
अहोई अष्टमी
21 अक्तूबर
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाने वाला व्रत अहोई अष्टमी कहलाता है। अहोई अष्टमी विवाहित महिलाएं अपनी संतानों के सुखमय जीवन एवं हर विपदा से उनकी रक्षा के लिए करती हैं। इस व्रत को लोकभाषा में अहोई आठें या करकाष्टमी भी कहा जाता है। अहोई का शाब्दिक अर्थ है-अनहोनी को होनी में बदलने वाली शुभ तिथि। अनहोनी को टालने वाली जगत जननी देवी पार्वती हैं, इसलिए इस दिन मां पार्वती की पूजा-अर्चना अहोई माता के स्वरूप में की जाती है।
रमा एकादशी व्रत
24 अक्तूबर
कार्तिक मास में दीपावली से पहले आने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। रमा एकादशी भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी के नाम पर है। जिन्हें रमा भी कहते हैं। इस पावन एकादशी के बारे में मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने वाले पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है और वह सभी पापों से मुक्त होते हुए अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
धनतेरस
25 अक्टूबर
25 अक्तूबर से पांच दिनों का महापर्व दिवाली आरंभ हो जाएगा। पहले दिन यानी 25 अक्तूबर को धनतेरस है।कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इसे धनतेरस कहते हैं। धनवंतरी के जन्म के अलावा इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर की भी पूजा होती है। भगवान धनवंतरी समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है।
धनतेरस शुभ मुहूर्त
शाम 19:10 से 20:15 तक
प्रदोष काल
17:42 से 20:15 तक
वृषभ काल
18:51 से 20:47 तक