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हज यात्रा शुरू, जानिए इसका इतिहास, हर मुसलमान के लिए क्यों जरूरी है हज करना

Mon, 20 Aug 2018 05:44 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 20 Aug 2018 05:44 PM IST
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haj yatra 2018 start today know interesting facts about haj yatra and kaaba

सऊदी अरब के मक्का शहर में काबा को इस्लाम में सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। इस्लाम का यह प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान दुनिया के मुसलमानों के लिए काफ़ी अहम है। इस साल उम्मीद है कि हज पर 20 लाख से ज़्यादा मुसलमान सऊदी अरब पहुंचेंगे। जानिए हज से जुड़ी कुछ ख़ास बातें-

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हज पर जाने का मक़सद क्या होता है?
इस्लाम के कुल पाँच स्तंभों में से हज पांचवां स्तंभ है। सभी स्वस्थ और आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमानों से अपेक्षा होती है कि वो जीवन में एक बार हज पर ज़रूर जाएं।हज को अतीत के पापों को मिटाने के अवसर के तौर पर देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि हज के बाद उसके तमाम पिछले गुनाह माफ़ कर दिए गए हैं और वो अपनी ज़िंदगी को फिर से शुरू कर सकता है। ज़्यादातर मुसलमानों के मन में जीवन में एक बार हज पर जाने की इच्छा होती है।

जो हज का ख़र्च नहीं उठा पाते हैं उनकी धार्मिक नेता और संगठन आर्थिक मदद करते हैं। कुछ मुसलमान तो ऐसे भी होते हैं जो अपनी ज़िंदगी भर की कमाई हज पर जाने के लिए बचाकर रखते हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों से ऐसे हाजी भी पहुंचते हैं जो हज़ारों मील की दूरी महीनों पैदल चलकर तय करते हैं और मक्का पहुंचते हैं।

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मुसलमानों के लिए इस्लाम के पाँच स्तंभ काफ़ी मायने रखते हैं। ये स्तंभ पाँच संकल्प की तरह हैं। इस्लाम के मुताबिक़ जीवन जीने के लिए ये काफ़ी अहम हैं। ये हैं इस्लाम के पांच स्तंभ

तौहीद- यानी एक अल्लाह और मोहम्मद उनके भेजे हुए दूत हैं इसमें हर मुसलमान का विश्वास होना।
नमाज़- दिन में पाँच बार नियम से नमाज़ अदा करना।
रोज़ा- रमज़ान के दौरान उपवास रखना।
ज़कात- ग़रीबों और ज़रूरतमंद लोगों को दान करना।
हज- मक्का जाना।

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हज यात्रा

हज का इतिहास क्या है?
चार हज़ार साल पहले मक्का का मैदान पूरी तरह से निर्जन था। मुसलमानों का मानना है कि पैग़ंबर अब्राहम ने अपनी पत्नी हाजिरा और बेटे इस्माइल को फ़लस्तीन से अरब लाने का निर्देश दिया ताकि उनकी पहली पत्नी सारा की ईर्ष्या से उन्हें बचाया जा सके।अल्लाह ने पैग़ंबर अब्राहम से उन्हें अपनी किस्मत पर छोड़ देने के लिए कहा। उन्हें खाने की कुछ चीज़ें और थोड़ा पानी दिया गया। कुछ दिनों में ही ये सामान ख़त्म हो गया। हाजिरा और इस्माइल भूख और प्यास से बेहाल हो गए।मायूस हाजिरा सफ़ा और मारवा पहाड़ी से मदद की चाहत में नीचे उतरीं। भूख और थकान से टूट चुकी हाजिरा गिर गईं और उन्होंने संकट से मुक्ति के लिए अल्लाह से गुहार लगाई। इस्माइल ने ज़मीन पर पैर पटका तो धरती के भीतर से पानी का एक सोता फूट पड़ा और दोनों की जान बच गई।

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काबा

हाजिरा ने पानी को सुरक्षित किया और खाने के सामान के बदले पानी का व्यापार भी शुरू कर दिया। जब पैग़ंबर अब्राहम फ़लस्तीन से लौटे तो उन्होंने देखा कि उनका परिवार एक अच्छा जीवन जी रहा है और वो पूरी तरह से हैरान रह गए।पैगंबर अब्राहम को अल्लाह ने एक तीर्थस्थान बनाकर समर्पित करने को कहा। अब्राहम और इस्माइल ने पत्थर का एक छोटा-सा घनाकार निर्माण किया। इसे काबा कहा जाता है।

अल्लाह के प्रति अपने भरोसे को मज़बूत करने ही हर साल यहां मुसलमान आते हैं। सदियों बाद मक्का एक फलता-फूलता शहर बन गया और इसकी एकमात्र वजह पानी के मुकम्मल स्रोत का मिलना था।धीरे-धीरे लोगों ने यहां अलग-अलग ईश्वर की पूजा शुरू कर दी। पैगंबर अब्राहम का पाक स्थान मूर्तियों को रखने का ठिकाना बन गया। सालों बाद अल्लाह ने पैग़ंबर मोहम्मद को कहा कि वो काबा को पहले जैसी स्थिति में लाएं और वहां केवल अल्लाह की ज़ियारत होने दें।628 साल में पैग़ंबर मोहम्मद ने अपने 1400 अनुयायियों के साथ एक यात्रा शुरू की। यह इस्लाम की पहली तीर्थयात्रा बनी और इसी यात्रा में पैग़ंबर अब्राहम की धार्मिक परंपरा को फिर से स्थापित किया गया।

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