आज विध्नहर्ता, वक्रतुण्ड, गजकर्णक, बुद्धिविधाता और लंबोदर भगवान गणेश घर-घर पधार रहे हैं। 31 अगस्त 2022 से 09 सितंबर तक भगवान गणपति आपके घर विराजेंगे। विघ्नहर्ता और गौरीपुत्र भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना और पूजा-आराधना की तैयारियां पूरी हो चुकी है। वैदिक पंचांग के अनुसार भगवान गणेश का जन्मोत्सव भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मध्याह्र काल में हुआ था इसलिए आज गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे। सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 01 बजकर 20 मिनट तक गणपति की स्थापना के लिए के सबसे अच्छ समय रहेगा। भगवान गणेश का स्वरूप और उनका जीवन बहुत ही निराला और सीख प्रदान करने वाला है। गणपति के स्वरूप में सफल, सुखी और शांति भरे जीवन जीने कई सूत्र छिपे हुए हैं। गणेशोत्सव के मौके पर आज हम आपको भगवान गणेश और उनकी पूजा से जुड़े तमाम सवाल के जवाब देंगे। जैसे सबसे पहले गणेश पूजन क्यों होती है? भगवान गणेश की सिद्धिदाता क्यों कहा जाता है? गणेश जी को दूर्वा अतिप्रिय क्यों हैं? गणेश जी को मोदक क्यों प्रिय है और उनका एक दांत टूटा हुआ क्यों हैं? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब।
Ganesh Chaturthi 2022: भगवान गणेश से जुड़ी हैं कई मान्यताएं, सवाल-जवाब से जानिए हर एक की जानकारी
सवाल - भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता क्यों माना गया है?
जवाब- भगवान शिव के द्वारा मिले वरदान के कारण भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। इसके अलावा भगवान गणेश जल तत्व के देवता हैं और सभी देवी-देवताओं का इसमें वास माना गया है। जलतत्व के अधिपति देवता होने के कारण प्रथम पूज्य हैं। सृष्टि में सबसे पहले चारो तरफ जल ही जल था। इसके अलावा शिवपुराण में वर्णन है कि जब भगवान गणेश माता पार्वती के द्वारपाल की भूमिका में थे,तब भगवान शिव क्रोध में आकर गणेशजी का सिर काट दिया था। माता पार्वती के क्रोध में आने के बाद शिवजी ने भगवान गणेश के शरीर में हाथी के बच्चे का सिर जोड़ दिया था। भगवान गणेश के इस रूप में उनकी कैसी पूजा होगी? तब माता पार्वती के इस सवाल पर भगवान शिव ने वरदान दिया कि सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होगी। मान्यता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और आने वाले सभी विघ्नों को दूर कर देते हैं।
सवाल- शुभ कार्य में सबसे पहले श्री गणेशाय नम:क्यों लिखा जाता है?
जवाब- क्योंकि भगवान गणेश गणों के अधिपति देवता हैं और अक्षरों को गण कहा जाता है। इसी वजह से भगवान को गणेश और गजानन भी कहा जाता है। व्याकरण में भी गण शब्द आता है। गण के अधिष्ठाता देवता होने के कारण इन्हें भगवान गणेश कहा गया है। ऐसे में किसी भी तरह का शुभ कार्य शुरू करने से पहले जैसे विद्यारंभ, गृह प्रवेश, विवाह, धार्मिक अनुष्ठान और लेखन करने से पहले श्री गणेशाय नम: लिखा जाता है। ताकि शुभ कार्य या लेखन में कोई बाधा न आने पाए।
सवाल - भगवान गणेश को सिद्धिदाता क्यों कहा जाता है ?
जवाब- क्योंकि बिना सिद्धि प्राप्ति किए कोई भी कार्य संपन्न नहीं हो सकता। सिद्धि श्रद्धा और विश्वास से बना हुआ है। हिंदू धर्म में भगवान शिव को विश्वास और माता पार्वती को श्रद्धा का प्रतीक और रूप माना गया है। किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए श्रद्धा और विश्वास का होना बहुत ही जरूरी होता है। जहां पर श्रद्धा का भाव नहीं होता वहां आत्मविश्वास नहीं पैदा हो सकता और जहां विश्वास नहीं होता वहां श्रद्धा का भाव नहीं आ सकता। ऐसे में अगर कोई शुभ संकल्प के साथ कार्य की शुरुआत की जाए तो उसमें श्रद्धा और विश्वास दोनों का होना जरूरी होता है।