भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पूरे देश में गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस दिन घर पर भगवान गणेश की स्थापना की जाती है। भगवान गणेश सभी देवों में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता है। कोई भी शुभ कार्य करने से सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है। भगवान गणेश को मंगलमूर्ति और विध्नहर्ता कहा जाता है क्योंकि इनके सभी अंग जीवन की सही दिशा देने की सीख देते हैं।
भगवान गणेश के हर एक अंग में है ज्ञान की पाठशाला
बड़ा मस्तक
भगवान गणेश का मस्तक काफी बड़ा और विशाल होता है। अंग विज्ञान के अनुसार बड़े सिर वाला व्यक्ति में कुशाग्र बुद्धि और नेतृत्व करने की क्षमता होती है।
संदेश- अपनी सोच को बड़ा बनाए रखना चाहिए।
भगवान गणेश की आंखे छोटी आकार की है। अंग विज्ञान के अनुसार जिस व्यक्ति की छोटी आंख होती है वह चिंतनशील और गंभीर स्वभाव का होता है।
संदेश- हर चीज की गहराई से अध्ययन करना चाहिए। ऐसा करने से आपके फैसले सही साबित होते हैं।
गणेश जी के कान काफी बड़े होते हैं। बड़े कान वाले व्यक्ति भाग्यशाली और दीर्घायु होते हैं। बड़े कान वाले सुनते सबकी है लेकिन निर्णय करते हैं अपनी बुद्धि और विवेक से।
संदेश- गणेश जी के सूप जैसे कान से यह संदेश मिलता है कि बुरी चीजों को छांटकर कर दिया जाता है और अच्छी बातों को ग्रहण कर लिया जाता है।
सूंड
भगवान गणेश की नाक यानी सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संदेश देती है।
संदेश- जीवन में हमेशा सक्रिय रहना चाहिए चाहे दुख हो या सुख हमेशा इसके लिए तैयार रखना चाहिए।