धनतेरस वाले दिन से ही दिवाली का पंचदिवसीय त्योहार शुरू हो जाता है जो भैयादूज तक चलता है। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाई जाती है। इसके दो दिन बाद अमावस्या के दिन दिवाली पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है। 13 नवंबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। उसके अगले दिन 14 नवंबर को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। धनतेरस के दिन से दिए जलाने के परंपरा शुरू हो जाती है जो दिवाली तक चलती है। धनतेरस के दिन से दिवाली तक तीन मुख्य दीपक भी जलाएं जाते हैं जो बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन दीपकों को प्रज्वलित करने का उल्लेख पुराणों और पौराणिक कथाओं में भी मिलता है। ये दीपक व्यक्ति को हर तरह की विपत्ति से बचाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि क्यों जलाए जाते हैं ये तीन मुख्य दीपक....
Diwali 2020: धनतेरस से दिवाली तक जलाए जाने वाले ये तीन दीपक दिलाते हैं सारे संकटों से छुटकारा
धनतेरस पर मुख्य रुप से धनवंतरी भगवान और लक्ष्मी पूजन किया जाता है। लेकिन इस दिन यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। इस दीपक को रात्रि के समय जलाया जाता है, जब परिवार के सभी सदस्य घर में आ चुके हो। यम का दीपदान करने के लिए पुराना दीपक प्रयोग मान लाया जाता है। यम का दीपक जलाने के लिए उसमें सरसों का तेल और बत्ती डालकर दरवाजे के बाहर या फिर कूड़ें के स्थान के निकट दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दिया जाता है। क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। मान्यता है कि यह दीपक जलाने के परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस बात का वर्णन पौराणिक कथा में भी मिलता है। यम का दीपक जलाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीतयामिति।
धनतेरस के दूसरे दिन यानि चतुर्दशी तिथि जिसे नरक चतुर्दशी या फिर रूपचौदस भी कहा जाता है। इस दिन भी यम के नाम का दीपक जलाने के परंपरा है। यह दीपक घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य द्वारा जलाया जाता है। इस दीपक को किसी सूप (गेंहू साफ करने का पात्र) में या फिर किसी थाली में रखकर जलाया जाता है। इसे घर में जलाने के बाद देहली के बाहर या फिर घर से कहीं दूर रख दिया जाता है। इससे घर की बुरी शुक्तियां और नकारात्मक ऊर्जा भी बाहर निकल जाती है।
छोटी दिवाली के अगले दिन दिवाली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन विशेषतौर पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है। दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी की समक्ष गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाया जाता है। उसके बाद अपने कुलदेवी-देवताओं के लिए भी एक दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इससे उनकी छत्रछाया पूरे परिवार पर बनी रहती है। जिससे किसी प्रकार का कोई संकट आने से पहले ही टल जाता है। इसके अलावा एक दीपक पितरों के नाम का भी जला सकते हैं जिससे उनका आशीर्वाद आप पर बना रहता है।