ज्यादातर लोगों नहीं पता होता है कि चारधामों में कौन से स्थल आते हैं और छोटा चारधाम की यात्रा किसे कहते हैं, इनका महत्व क्या है। कुछ लोग यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा को चारो धाम की यात्रा मानते हैं, लेकिन यह यात्रा एक ही धाम की होती है। इन धामों की यात्रा को छोटा चार धाम कहा जाता है। लेकिन इनका भी बहुत महत्व है तो जानते है क्या है छोटे चार धाम का महत्व और कौन से स्थान चार धाम के अंतर्गत आते हैं।
किन स्थलों को कहा जाता है चार धाम मिलेगी पूरी जानकारी
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छोटे चार धाम का महत्व
बदरीनाथ भगवान विष्णु का धाम है तो वहीं केदारनाथ शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में आता है। इस स्थान को शंकर जी के विश्राम का स्थल माना गया है। जबकि युमनोत्री यमुना का उद्गम स्थल है और गंगोत्री गंगा का उद्गम स्थल है, इसके कारण इन स्थानों के दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। उत्तर भारत में हिमालय की गोद में बसे होने के कारण इन स्थानों का और भी महत्व माना गया है। इन स्थानों को बहुत ही पवित्र माना गया है। आगे चार धामों के बारे में जानें...
बदरीनाथ हिमालय पर्वत के शिखर पर बसा है हिंदू धर्म के लोगों के लिए यह आस्था का केंद्र बिंदु है। बद्रीनाथ में चतुर्भुज रूप में शालग्रामशिला से बनी हुई मूर्ति हैं जिसमें भगवान बद्री ध्यान मुद्रा में हैं। माना जाता है कि यहां पर भगवान विष्णु छः माह निद्रा में और छः माह जाग्रत रहते हैं।
बदरीनाथ को आंठवा बैकुंठ भी कहा जाता है। यहां पर विष्णु जी को नर-नारायण के विग्रह रूप में पूजा जाता है। यहां पर अखंड ज्योति प्रजव्लित रहती है। यही पर पवित्र अलकनंदा नदी भी बहती है। माना जाता है कि इस धाम को भगवान श्री राम ने स्थापित किया था। बद्रीनाथ से पहले केदारनाथ के दर्शन करने का बहुत महत्व माना गया है। कहते हैं कि यहां के दर्शन करने से मनुष्य जनम और मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
जगन्नाथ पुरी भारत के ओडिशा में समुद्र तट पर बसा है, इस धाम को भी चारों धामों में से एक माना गया है। यह मंदिर भगवान विष्णु के कृष्ण अवतार को समर्पित है। इसकी छटा बहुत ही अद्भुत और मंत्रमुग्ध कर देने वाली है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय का है। जगन्नाथ का तात्पर्य होता है सारे जगत के स्वामी..इस मंदिर को सात पवित्र पुरियों में भी सम्मिलित किया गया है। हर वर्ष यहां विशाल जगन्नाथ रथ यात्रा निकलती है। जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा अपने भव्य रथों पर विराजमान होते हैं।
हिंदुओं का पवित्र धाम रमेश्वरम तमिलनाडु के रामनाथपुरम में समुद्र के किनारे है। यह शंख के आकार का द्वीप है। यह स्थल चारो ओर से हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है। इसकी छटा निराली है। रामेश्वरम भी शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक है। मान्यता है कि यहां पर प्रभु श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। कहा जाता है कि यहीं से भगवान राम ने पत्थर के सेतु का निर्माण भी करवाया था। जो महत्व उत्तर भारत में केदारनाथ और काशी का माना जाता है वही महत्व दक्षिण में रामेश्वरम का है।