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शारदीय नवरात्रि और महिषासुर वध का क्या है संबंध? जानें मां दुर्गा की विजय की पूरी पौराणिक कथा

Sun, 04 Oct 2026 11:05 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 04 Oct 2026 11:05 AM IST
सार

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दौरान देवी ने महिषासुर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। आइए जानते हैं इस पौराणिक कथा की पूरी कहानी।

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Sharadiya Navratri and Mahishasura Vadh Know the Mythological Story of Maa Durga’s Victory
महिषासुर वध - फोटो : amar ujala

विस्तार

हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त माता रानी की आराधना के साथ व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और देवी की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि का यह पर्व आखिर शुरू कैसे हुआ? इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा बताई जाती है, जिसका संबंध महिषासुर और मां दुर्गा के बीच हुए युद्ध से है।

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Sharadiya Navratri and Mahishasura Vadh Know the Mythological Story of Maa Durga’s Victory
महिषासुर वध - फोटो : ai

महिषासुर के अत्याचार से परेशान थे देवता
पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और वरदान प्राप्त किया। इस वरदान के बल पर वह बेहद शक्तिशाली हो गया और देवताओं, मनुष्यों तथा पृथ्वी लोक पर अत्याचार करने लगा। महिषासुर के बढ़ते आतंक से देवता भी चिंतित हो गए। उसे रोकने के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी समेत अन्य देवी-देवताओं से सहायता की प्रार्थना की।

देवताओं की शक्तियों से हुआ मां दुर्गा का प्राकट्य
महिषासुर का सामना करने के लिए देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों को एकत्र किया। इन्हीं दिव्य शक्तियों से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। देवताओं ने मां दुर्गा को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए और उनसे महिषासुर का अंत करने का आग्रह किया। इसके बाद मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध शुरू हुआ। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह युद्ध लगातार नौ दिनों तक चला।

नौ दिनों के युद्ध के बाद हुआ महिषासुर का वध
कहा जाता है कि मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक युद्ध चलता रहा। दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध कर दिया। इसके साथ ही देवताओं और पृथ्वी लोक को उसके अत्याचार से मुक्ति मिली। इसी विजय की स्मृति में नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना और दसवें दिन विजयादशमी मनाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। नवरात्र को इसलिए भी शक्ति, भक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

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Sharadiya Navratri and Mahishasura Vadh Know the Mythological Story of Maa Durga’s Victory
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा - फोटो : ai

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। क्रमशः भक्त मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। मान्यता है कि देवी के प्रत्येक स्वरूप की अपनी विशेष महिमा है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा, व्रत, मंत्र जाप और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

 

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क्यों खास है शारदीय नवरात्र? - फोटो : Adobe Stock
क्यों खास है शारदीय नवरात्र?
शारदीय नवरात्र को देवी उपासना के सबसे प्रमुख पर्वों में से एक माना जाता है। इन नौ दिनों में शक्ति की आराधना के साथ आत्मसंयम और भक्ति का महत्व बताया गया है। नवरात्र के बाद दशहरे का पर्व मनाया जाता है, जो अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है।

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शारदीय नवरात्रि 2026 - फोटो : AI

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

  • घटस्थापना तिथि: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
  • घटस्थापना शुभ मुहूर्त: सुबह 6:20 बजे से 10:12 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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