Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि में कलश स्थापना से चमकेगी आपकी किस्मत, बस इन बातों का रखें ध्यान
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पौराणिक समय से ही पूजा के दौरान कलश को अमृत के समान माना गया है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जो कलश निकाला गया था, पूजा में भी उसी अमृत कलश का इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग पूजा में अलग-अलग तरीके से कलश स्थापित किया जाता है। वहीं नवरात्रि में कलश स्थापना अधिक फलदायी माना जाता है।
कलश के अंदर पंच पल्लव, जल, दुर्वा, चंदन, पंचामृत, सुपारी, हल्दी, अक्षत, सिक्का, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, डाले जाते हैं। इसके बाद कलश के ऊपर रोली से स्वास्तिक बनाया जाता है। इसके अलावा कलश में चारों ओर अशोक के पत्ते लगाएं और स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से बांधें और इस नारियल को कलश के ऊपर पर रखते हुए देवी दुर्गा का आहवाहन करें। फिर दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
कलश स्थापना से पहले एक बात का ध्यान रखें कि कलश स्टील सा किसी अन्य अशुद्ध धातु का नहीं होना चाहिए। कलश के लिए सोना, चांदी, तांबा, पीतल के धातु के अलावा मिट्टी का घड़ा काफी शुभ माना गया है। इसके अलावा कलश के ऊफर आम के पत्ते जरूर रखें।
नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में नारियल रखने से परिवार के सदस्यों की जिंदगी से सभी तरह की बीमारियां दूर होती हैं। कहा जाता है कि कलश पर नारियल का मूंह ऊपर की तरफ राहु के लिए रखा जाता है।