चैत्र मास की प्रतिपदा से 13 अप्रैल से नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है। जिसका समापन 21 अप्रैल 2021 को चैत्र नवमी की पूजा के साथ होगा। इन नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार मंत्र देवी-देवताओं की आत्मा हैं और यंत्र उनका शरीर। ज्योतिष शास्त्र में भी यंत्र पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यंत्र पूजन से साधक को बहुत शीघ्र लाभ प्राप्त होता है। यदि आप नवरात्रि में दुर्गा बीसा यंत्र की स्थापना अपने घर में करते हैं तो इससे आपको अप्रत्याशित लाभ देखने को मिलेगा। नवरात्रि में दुर्गा बीसा यंत्र की स्थापना करके उसका पूजन करना बहुत शुभ फलदाई रहता है। जानिए दुर्गा बीसा यंत्र स्थापित करने की विधि और इससे होने वाले लाभ।
Charitra Navratri 2021: नवरात्रि में अपने घर में करें इस यंत्र की स्थापना, मां दुर्गा के आशीर्वाद से धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है घर
दुर्गा बीसा यंत्र बहुत ही प्रभावशाली माना गया है। नवरात्रि में दुर्गा बीसा यंत्र की स्थापना करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस यंत्र के स्थापना से घर में धन-वैभव आता है। इसके साथ ही इस यंत्र से आपके और परिवार के लिए एक रक्षा कवच भी मिलता है।
आपके परिवार पर किसी तरह की बुरी शक्तियों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। आपके जीवन की समस्याएं समाप्त होने लगती हैं। जानते हैं दुर्गा बीसा यंत्र की स्थापना विधि।
दुर्गा बीसा यंत्र के विषय में दुर्गा सप्तशती पाठ में भी उल्लेख किया गया है। दुर्गा सप्तशती के अध्याय 4 श्लोक 17 के अनुसार जो व्यक्ति सिद्ध किए हुए दुर्गा बीसा यंत्र की प्रतिदिन पूजा करता है से उसकी रक्षा स्वयं मां दुर्गा करती हैं। इस यंत्र में मां दुर्गा का रक्षा मंत्र ओम दुम दुम दुम दुर्गाये नम: लिखा होता है इसलिए यह शक्तियों का भंडार है। इस यंत्र को शक्ति पुंज भी कहा गया है।
यह यंत्र आपको बाजार में बनाया मिल जाता है या आप इसे भोजपत्र पर स्वयं भी बना सकते हैं। इसके लिए आप अनार की लकड़ी की कलम और अष्टगंध का प्रयोग करें। इस यंत्र के केंद्र में त्रिकोण बना होता है जिसमें एक से नौ तक के अंक लिखें होते हैं और मां दुर्गा का रक्षा मंत्र लिखा जाता है। यदि आप बाजार से यंत्र लाते हैं तो इसे गंगाजल से पवित्र करके ही मां की प्रतिमा के पास रखें और फिर पूजन करें। इस यंत्र की प्रतिदिन पूजा करें और उसके बाद का मंत्र जप अवश्य करें।
।।ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः।।