चुनाव के चलते पश्चिम बंगाल की सियासत सुर्खियों में है। जहां एक तरफ भाजपा राज्य की सत्ता पाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है तो वहीं मुख्यमंत्री ममदा दीदी भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए खूब 'खेला' खेल रही हैं। मंगलवार को ममता दीदी नंदीग्राम पहुंचीं और यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। दरअसल, इस बार नंदीग्राम से ही दीदी चुनाव लड़ रही हैं। जनसभा को संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री ममता दीदी ने चंडी पाठ किया। धार्मिक दृष्टि से चंडी पाठ क्या होता है, इसके पाठ से क्या लाभ हैं, आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
Chandi Path: ममता दीदी ने किया चंडी पाठ, जानें इसका धार्मिक महत्व और लाभ
चंडी पाठ को दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चंडी पाठ करना बेहद ही शुभ माना जाता है। इसका पाठ कार्य सिद्धि, अभय प्राप्ति और त्रिबिध तापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है। इसमें मां के तीन चरित्र प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र और उत्तम चरित्र का वर्णन किया गया है।
चंडी पाठ करने वालों को तमाम कष्टों से छुटकारा मिलता है। जो लोग सबकुछ होते हुए भी परिवार में तनाव और कलह से परेशान हैं, जो हमेशा शत्रुओं से दबे रहते हैं, मुकदमो में हार का भय सताता रहता है या जो प्रेत आत्माओं से परेशान रहते हैं उन्हें मधु और कैटभ जैसे राक्षसों का संहार करने वाली मां महाकाली के दुर्गासप्तशती के 'प्रथम चरित्र' का पाठ करना या सुनना चाहिए।
जो लोग बेरोजगारी की मार से परेशान हैं, कर्ज में डूबे हुए हैं, जिन्हें चारों ओर अन्धकार दिखाई दे रहा हो, जो श्री हीन हो चुके हों, जिनका कार्य व्यापार बंद हो चुका हो, जिनके जीवन में स्थिरता नहीं हो, जिनका स्वास्थ्य साथ ना दे रहा हो, घर की अशांति से परिवार बिखर रहा हो अथवा पूर्णतः भौतिक सुखों से वंचित हों ऐसे प्राणी को मां महालक्ष्मी की आराधना और मध्यम चरित्र का पाठ करना या सुनना चाहिए।
जिनकी बुद्धि मंद पड़ गयी हो, पढाई में मन न लग रहा हो, स्मरणशक्ति कमजोर हो रही हो, सन्निपात की बीमारी से ग्रसित हों, जो शिक्षा-प्रतियोगिता में असफल रहते हों, जो विद्यार्थी ज्यादा पढ़ाई करते हो और नंबर कम आता हो अथवा जिनको ब्रह्मज्ञान और तत्व की प्राप्ति करनी हो उन्हें माता सरस्वती की आराधना और 'उतम चरित्र' का पाठ करना चाहिए।