बसंत पंचमी न केवल बसंत ऋतु के आगमन का त्योहार है बल्कि ज्ञान की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस भी है। हर वर्ष माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार बंसत पंचमी 16 फरवरी दिन बुधवार को मनाई जाएगी। मां सरस्वती की कृपा से व्यक्ति को ज्ञान और स्वर की प्राप्ति होती है। किसी भी देवी-देवता की पूजा में मंत्रों का बहुत महत्व होता है। आप बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विधिवत् पूजा करके और मंत्र जाप करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि किस विधि से करनी चाहिए मां सरस्वती की पूजा और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।
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basant panchami 2021: बसंत पंचमी पर इन मंत्रों के जाप से करें मां सरस्वती को प्रसन्न
Thu, 04 Feb 2021 06:36 PM IST
Shashi Shashi
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Published by: Shashi Shashi
Updated Thu, 04 Feb 2021 06:36 PM IST
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Basant Panchami 2021
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सरस्वती पूजन
बसंत पंचमी पूजा विधि
- बसंत पंचमी के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- तत्पश्चात मां सरस्वती की चंदन या कुमकुम से तिलक करें।
- माता सरस्वती को भी पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
- दीप-धूप जलाएं और पीले पुष्प, पीले मिष्ठान अर्पित करें।
- शिक्षा से संबंधित चीजें जैसे कॉपी,किताब और कलम आदि पर रोली से तिलक करके अक्षत चढ़ाकर मां सरस्वती के समक्ष रखें।
- जो लोग संगीत प्रेमी हो उन्हें इस दिन वाद्य यंत्रो की पूजा भी करनी चाहिए।
- मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए उनका प्रिय भोग खीर और मालपुआ भी अर्पित करना चाहिए।
- उक्त विधि से मां शारदे का पूजन करने के बाद उनकी वंदना करें और निम्न में से किसी मंत्र का जाप करें।
Basant Panchami 2021
- ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।
- ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।
- ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।
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सरस्वती देवी
1. सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।
शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
2. शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां।
हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां||
शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
2. शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां।
हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां||