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Akshaya Tritiya 2022: अक्षय तृतीया पर खुलते हैं बद्रीनाथ मंदिर के कपाट,जानिए इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें

Mon, 25 Apr 2022 11:22 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 25 Apr 2022 11:22 AM IST
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Badrinath Temple Opens On Akshaya Tritiya Know About Mysterious Facts In Hindi
बद्रीनाथ मंदिर: भगवान नारायण के वास के रूप में जाना जाने वाला बद्रीनाथ धाम आदि शंकराचार्य की कर्म स्थली रहा है। यह भी माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं सदी में मंदिर का निर्माण करवाया था। - फोटो : Social media
Akshaya Tritiya 2022: हिंदुओं के चार प्रमुख धामों में से एक बद्रीनारायण तीर्थस्थल भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार नर एवं नारायण की तपोभूमि है। हिमालय की तलहटी में बसे बद्रीनाथ धाम को''धरती का वैकुण्ठ''कहा जाता है। बद्रिकाश्रम यानि ''बदरी सदृशं तीर्थम् न भूतो न भविष्यति ''अर्थात बद्रीनाथ जैसा स्थान मृत्युलोक में न पहले कभी था न भविष्य में होगा। आज आपको बताते हैं भगवान बद्रीनाथ के बारे कुछ रोचक बातें-

 
Badrinath Temple Opens On Akshaya Tritiya Know About Mysterious Facts In Hindi
- फोटो : ANI

1- इस धाम के बारे में कहावत है कि-"जो जाए बद्री,वो न आए ओदरी"यानि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है उसे माता के गर्भ में दोबारा नहीं आना पड़ता,प्राणी जन्म और मृत्यु के चक्र से छूट जाता है।

2- भगवान नारायण के वास के रूप में जाना जाने वाला बद्रीनाथ धाम आदि शंकराचार्य की कर्म स्थली रहा है। यह भी माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं सदी में मंदिर का निर्माण करवाया था।

3- बद्रीनाथ मंदिर में भगवान विष्णु की एक मीटर ऊंची काले पत्थर(शालिग्राम)की प्रतिमा है जिसमें भगवान विष्णु ध्यान मुद्रा में सुशोभित है। मंदिर के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते है जिन्हें रावल कहा जाता है। यह जब तक रावल के पद पर रहते है इन्हें ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना होता है।

4- मंदिर परिसर में अलग-अलग देवी-देवताओं की 15 मूर्तियां विराजमान हैं। अक्षय तृतीया पर जब बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं उस समय भी मंदिर में एक दीपक जलता रहता है,इस दीपक के दर्शन का बड़ा महत्त्व है। मान्यता है कि 6 महीने तक बंद दरवाज़े के अंदर इस दीप को देवता जलाए रखते हैं।

Badrinath Temple Opens On Akshaya Tritiya Know About Mysterious Facts In Hindi
बद्रीनाथ मंदिर - फोटो : iStock
5- माना जाता है कि भगवान विष्णु विग्रह रूप में यहाँ तपस्यारत हैं। यहाँ के दिव्य दर्शन करने पर मेरा अनुभव है कि भगवान विष्णु के विग्रह को एकटक निहारने पर ऐसी अनुभूति होती है जैसे सामने साक्षात भगवान विष्णु हों।

6- यहां वनतुलसी की माला,चने की कच्ची दाल,गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है। वन तुलसी की महक से पूरा माहौल आनंदित हो जाता है।

7- मंदिर के निकट बनी व्यास और गणेश की गुफाएं हैं जो अति सुन्दर हैं। यहीं बैठकर वेदव्यास जी ने महाभारत की रचना की थी। माना जाता हैं कि पांडव,द्रोपदी के साथ इसी रास्ते होकर स्वर्ग गए थे।

8- मंदिर के पास ही गरम पानी के कुंड(तप्त व नारद कुंड)हैं जिनमें श्रद्धालु नहाकर फिर दर्शन का लाभ उठाते हैं। इन कुंडों में सल्फर की मात्रा अधिक होने से,यहां नहाने पर त्वचा संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है।
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Badrinath Temple Opens On Akshaya Tritiya Know About Mysterious Facts In Hindi
बद्रीनाथ मंदिर - फोटो : Social media/pixabay
9- बद्रीनाथ धाम में ब्रह्मकपाल तीर्थ है जहाँ शिव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी,यहाँ पितरों को पिंड तर्पण दिया जाता है। भगवान बद्री विशाल के मंदिर परिसर में ही माँ लक्ष्मी का मंदिर है,बद्रीविशाल के दर्शन के उपरांत यहाँ भक्त माँ लक्ष्मी के चरणों में शीश झुकाकर उनसे आशीर्वाद लेते है।

10- मान्यता है कि जोशीमठ में जहां शीतकाल में बद्रीनाथ की चल मूर्ति रहती है,वहां नृसिंह का एक मंदिर है। शालिग्राम शिला में भगवान नृसिंह का अद्भुत विग्रह है। इस विग्रह की बायीं भुजा पतली है और समय के साथ यह और भी पतली होती जा रही है। जिस दिन इनकी कलाई मूर्ति से अलग हो जाएगी उस दिन नर-नारायण पर्वत एक हो जाएंगे। जिससे बद्रीनाथ का मार्ग बंद हो जाएगा,कोई यहाँ दर्शन नहीं कर पाएगा।  

11- भविष्य बद्री,जोशीमठ से 6 मील की दूरी पर कैलास की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है। यहाँ मंदिर के पास एक शिला है,इस शिला को ध्यान से देखने पर भगवान की आधी आकृति नज़र आती है।जब यह आकृति पूर्ण रूप ले लेगी तब यहाँ पर ही बद्रीनाथ के दर्शन का लाभ प्राप्त किया जाएगा।

12- पुराणों में उल्लेख मिलता है कि सतयुग में यहां भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन हुआ करते थे। शास्त्रों में वर्तमान बद्रीनाथ यानि बद्री विशाल धाम को भगवान का दूसरा निवास स्थान बताया गया है।और भविष्य में जहां भगवान का धाम होगा उसे भविष्य बद्री कहा गया है।
 
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