Ashadh Mahine Me Kya Kare Kya Na Kare: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह वर्ष का चौथा महीना होता है, जिसकी शुरुआत ज्येष्ठ पूर्णिमा के बाद होती है। यह महीना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसमें कई बड़े धार्मिक पर्व, व्रत और अनुष्ठान होते हैं। इस माह प्रमुख पर्वों में देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ रथयात्रा, और गुरु पूर्णिमा शामिल हैं। इन उत्सवों का सीधा संबंध भगवान विष्णु और गुरु परंपरा से होता है, जो इसे भक्ति और साधना के लिए उपयुक्त बनाते हैं। इस साल आषाढ़ माह 12 जून 2025 से शुरू होकर 10 जुलाई 2025 तक रहेगा।
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Ashadh Month 2025: आषाढ़ मास कब से होगा शुरू? इस महीने भूलकर भी न करें ये काम
Wed, 11 Jun 2025 06:29 AM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 11 Jun 2025 06:29 AM IST
सार
आषाढ़ महीने में भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस मास से देवशयन आरंभ होता है, यानी भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस कारण इस माह के बाद से मांगलिक कार्य जैसे विवाह आदि कुछ समय के लिए वर्जित हो जाते हैं।
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आषाढ़ मास में क्या करें क्या नहीं?
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आषाढ़ मास में क्या करें?
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आषाढ़ मास में क्या करें?
- इस माह में विशेष रूप से श्रीहरि विष्णु की आराधना करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
- गुरु पूर्णिमा इस माह का प्रमुख पर्व है, इसलिए अपने आध्यात्मिक या शैक्षणिक गुरु का आदर और सेवा करें।
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आषाढ़ मास में क्या करें?
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- मानसिक और आत्मिक बल बढ़ाने के लिए ध्यान, मंत्रजप और योग का अभ्यास करें।
- इस महीने अन्न, वस्त्र, छाता, जलपात्र आदि का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
- विशेष रूप से एकादशी व्रत का पालन करें, जो शरीर और मन की शुद्धि में सहायक होता है।
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आषाढ़ मास में क्या न करें?
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आषाढ़ मास में क्या न करें?
- विवाह, गृह प्रवेश जैसे कार्य इस माह से वर्जित हो जाते हैं, क्योंकि देवशयन काल आरंभ हो जाता है।
- शुद्ध और सात्विक आहार अपनाना इस माह में अनिवार्य माना गया है। इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध रहते हैं।
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आषाढ़ मास में क्या न करें?
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- धार्मिक नियमों का उल्लंघन, झूठ बोलना, छल-कपट, चोरी जैसे कर्म से बचें।
- इस मास में वृक्षों की कटाई से बचें। पेड़-पौधे जीवन का आधार होते हैं, और धार्मिक दृष्टि से इनका संरक्षण शुभ माना जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।