हमारे धर्मशास्त्र भले ही बहुत पहले लिखे गए हैं, परंतु आज के जीवन में भी ये उतना ही औचित्य रखते हैं, जितना उस समय था। शास्त्रों में बताई गई बातों को अपने जीवन में उतारकर हम एक संतुष्ट और सुखी जीवन जी सकते हैं। सुखी और समृद्धि के परिपूर्ण जीवन कौन नहीं चाहता है। हर व्यक्ति यह आशा करता है कि उसका जीवन खुशियों और समृद्धि से भरा हुआ हो, लेकिन एक सुखी और समृद्धि भरा जीवन जीने के लिए व्यक्ति को प्रयास भी करने पड़ते हैं। तो चलिए जानते हैं कि शास्त्रों में इस बारे में क्या बताया गया है।
अगर चाहते हैं कि धन संपत्ति से परिपूर्ण रहे आपका जीवन, तो शास्त्रों में बताई गई इन बातों को हमेशा रखें ध्यान
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार मनुष्य को हर माह की अष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और चतुर्दशी तिथि पर धार्मिक नियमों का पालन करते हुए अपने आचरण को सात्विक रखना चाहिए। इन तिथियों पर भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। शरीर पर तेल मालिश नहीं करना चाहिए। इन तिथियों पर प्रणय संबंध भी नहीं बनाने चाहिए। पूर्णतया ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए।
हिन्दू धर्म ईश्वर की प्रतीक प्रतिमाओं का पूजन करने की परंपरा है। पूजा-पाठ करने से संबंधित बातों को ध्यान में रखना भी आवश्यक होता है। पूजा करते समय ध्यान रखें कि पूजा-पाठ की कोई भी समाग्री या शंख, शालिग्राम आदि अशुद्ध जगह या जमीन पर बिना आसन के न रखें। इन सभी चीजों को लाल रंग का स्वच्छ कपड़ा बिछाकर या फिर चावल का आसन देकर रखना चाहिए।
पराई स्त्री पर न रखें बुरी नजर, न करें महिला का अपमान
धर्म शास्त्रों में स्त्री को अन्नपूर्णा और लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए कभी भी पराई स्त्री पर नजर नहीं रखनी चाहिए और न ही अपने घर की महिलाओं का अपमान करना चाहिए। पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि जो पुरुष पर स्त्री पर बुरी नजर रखता है, या नारी का अपमान करता है, वह कभी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता है। ऐसे लोगों के यहां हमेशा दरिद्रता निवास करती है।
सूर्यास्त के बाद न करें ये काम
उगते सूर्य के दर्शन और पूर्णिमा के चांद को निहारना बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार कभी भी सूर्य और चंद्रमा के अस्त होते समय दर्शन नहीं करने चाहिए। जो लोग अस्त होते सूर्य को देखते हैं उनमें नकारात्मकता का भाव आने लगता है। ऐसे लोगों को निराशा घेरने लगती है।