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पिछले 150 वर्षों से यहां हो रही है खंडित शिवलिंग की पूजा, जानिए क्यों?

Thu, 20 Jul 2017 12:42 PM IST
amarujala.com- presented by: विनोद शुक्ला
amarujala.com- presented by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 20 Jul 2017 12:42 PM IST
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 a place where worship of shivling in two part

पुराणों में किसी भी देवी-देवता की खण्डित मूर्ति की पूजा करना वर्जित माना जाता है। लेकिन देश में एक ऐसा मंदिर है जहां पर एक शिवलिंग के दो टुकड़ो की पूजा की जाती है। ऐसा शिवलिंग झारखंड के गोइलकेरा में स्थित है जहां पर पिछले 150 सालों से इस शिवलिंग की पूजा की जाती है। दरअसल इस शिवलिंग के खण्डित होने के पीछे एक अनोखी कथा है।

 a place where worship of shivling in two part

आजादी के पहले झारखंड के इस क्षेत्र में रेल लाइन के बिछाने का काम चल रहा था तो खुदाई के दौरान एक शिवलिंग निकला। तब वहां के मजूदरों ने खुदाई का काम बंद कर दिया।

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तब वहां पर मौजूद अंग्रेज इंजीनियर ने शिवलिंग को केवल एक पत्थर मनाते हुए शिवलिंग पर प्रहार करके उसको दो टुकड़ों में कर दिया। लेकिन शाम को वापस लौटते हुए उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।

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इस घटना के बाद मजदूरों और ग्रामीणों ने रेलवे लाइन की खुराई दूसरी तरफ से करने की मांग की। पहले तो अंग्रेज अधिकारी नहीं माने। लेकिन बाद में आस्था की आगे झुककर रेलवे लाइन की दिशा को बदल दिया। 

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आज भी जहां खुदाई में शिवलिंग निकला था आज वहां देवशाल मंदिर है और शिवलिंग के खंडित शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है। जबकि शिवलिंग का दूसरा टुकड़ा वहां से दो किलोमीटर दूर रतनबुर पहाड़ी पर है।

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