Happy New Year 2023 : आज से नया वर्ष का शुभारंभ हो चुका है। नए साल की शुरुआत कुछ ऐसे सूत्रों से करना चाहिए जो पूरे संसार के लिए प्रेरणास्रोत बने। जब अर्जुन अपनी राह से भटक गए थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन दर्शन का रास्ता दिखाया,जिसे श्रीमदभगवत् गीता के नाम से जाना जाता है। इस ग्रंथ का हर एक श्लोक जीवन के अलग-अलग पक्षों में आपका मार्गदर्शन करता है। गीत के सूत्रों के माध्यम से श्री कृष्ण व्यक्ति को हर परिस्थितियों में एक सा रहने की सीख देते हैं। गीता में कहा गया है कि सुख और दुख में व्यक्ति को एक जैसे ही रहना चाहिए क्योंकि कोई भी स्थिति स्थायी नहीं रहती है। अगर आप जीवन में परेशान है, कोई सही मार्ग नहीं मिल पा रहा हो, असफलता के कारण मन दुखी हो या नए साल की शुरुआत कुछ अच्छे ढंग से करना चाहते हैं तो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचित श्रीमदभगवत् गीता के इन 9 सूत्रों को पढ़ें। ये आपको पथ भ्रमित होने से बचाएगा। जानें भगवत गीता के सफलता दिलाने वाले 9 सूत्र।
Happy New Year 2023: नए साल में अपनाएं गीता के ये 9 सूत्र, जरूर मिलेगी सफलता
योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय।
सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।।
हे धनंजय! कर्म न करने का आग्रह त्यागकर, यश-अपयश के विषय में समबुद्धि होकर योगयुक्त होकर, कर्म कर, (क्योंकि) समत्व को ही योग कहते हैं।
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयत: शांतिरशांतस्य कुत: सुखम्।।
योगरहित पुरुष में निश्चय करने की बुद्धि नहीं होती और उसके मन में भावना भी नहीं होती। ऐसे भावनारहित पुरुष को शांति नहीं मिलती और जिसे शांति नहीं, उसे सुख कहां से मिलेगा।
विहाय कामान् य: कर्वान्पुमांश्चरति निस्पृह:।
निर्ममो निरहंकार स शांतिमधिगच्छति।।
जो मनुष्य सभी इच्छाओं व कामनाओं को त्याग कर ममता रहित और अहंकार रहित होकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है, उसे ही शांति प्राप्त होती है।
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कार्यते ह्यश: कर्म सर्व प्रकृतिजैर्गुणै:।।
कोई भी मनुष्य क्षण भर भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता। सभी प्राणी प्रकृति के अधीन हैं और प्रकृति अपने अनुसार हर प्राणी से कर्म करवाती है और उसके परिणाम भी देती है।