Gudi Padwa 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवसंवत्सर का प्रारंभ माना जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है। इस दिन को गुड़ी पड़वा के नाम से मनाया जाता है जिसका हिन्दू धर्म में बहुत महत्व माना गया है। गुड़ी का अर्थ है ध्वज अर्थात झंडा और प्रतिपदा तिथि को पड़वा कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार गुड़ी पड़वा 2 अप्रैल 2022 को है। इस दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि के बाद विजय के प्रतीक के रूप में घर में सुंदर गुड़ी लगाती हैं और उसका पूजन करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वहां की नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-शांति खुशहाली आती है। विशेष तौर पर यह पर्व कर्नाटक,गोवा,महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा का दिन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन खास तरह के पकवान श्री खंड,पूरनपोली,खीर आदि बनाए जाते हैं। गुड़ी पड़वा के बारे में कहा जाता है कि खाली पेट पूरन पोली का सेवन करने से चर्म रोग की समस्या भी दूर हो जाती है।
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Gudi Padwa 2022: जानिए क्यों और कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा का पर्व ?
Tue, 29 Mar 2022 10:47 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 29 Mar 2022 10:47 AM IST
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GUDI PADWA 2022: गुड़ी का अर्थ है ध्वज अर्थात झंडा और प्रतिपदा तिथि को पड़वा कहा जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
gudi padwa
सृष्टि के निर्माण का दिन
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुड़ी पड़वा के दिन ही जगतपिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ किया था और सतयुग की शुरुआत इसी दिन से हुई थी।यही कारण है कि इसे सृष्टि का प्रथम दिन या युगादि तिथि भी कहते हैं। इस दिन नवरात्रि घटस्थापन,ध्वजारोहण, संवत्सर का पूजन इत्यादि किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुड़ी पड़वा के दिन ही जगतपिता ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ किया था और सतयुग की शुरुआत इसी दिन से हुई थी।यही कारण है कि इसे सृष्टि का प्रथम दिन या युगादि तिथि भी कहते हैं। इस दिन नवरात्रि घटस्थापन,ध्वजारोहण, संवत्सर का पूजन इत्यादि किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि
- फोटो : amar ujala
वानरराज बाली पर विजय
रामायण काल में दक्षिण भारत पर बाली का अत्याचारी शासन था। सीताजी को ढूंढ़ते हुए जब भगवान राम की मुलाकात सुग्रीव से हुई तो उन्होंने श्री राम को बाली के अत्याचारों से अवगत कराया। तब भगवान राम ने बाली का वध कर वहां के लोगों को उसके कुशासन से मुक्ति दिलाई। मान्यता है कि यह दिन चैत्र प्रतिपदा का था। इसलिए इस दिन गुड़ी या विजय पताका फहराई जाती है।
रामायण काल में दक्षिण भारत पर बाली का अत्याचारी शासन था। सीताजी को ढूंढ़ते हुए जब भगवान राम की मुलाकात सुग्रीव से हुई तो उन्होंने श्री राम को बाली के अत्याचारों से अवगत कराया। तब भगवान राम ने बाली का वध कर वहां के लोगों को उसके कुशासन से मुक्ति दिलाई। मान्यता है कि यह दिन चैत्र प्रतिपदा का था। इसलिए इस दिन गुड़ी या विजय पताका फहराई जाती है।
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vikram samvat 2079
- फोटो : अमर उजाला
शालिवाहन शक संवत
एक ऐतिहासिक कथा के अनुसार शालिवाहन नामक एक कुम्हार के लड़के ने मिट्टी के सैनिकों की सेना बनाई और उस पर पानी छिड़ककर उनमें प्राण फूँक दिए और इस सेना की मदद से दुश्मनों को पराजित किया। इस विजय के प्रतीक के रूप में शालिवाहन शक संवत का प्रारंभ भी माना जाता है।
एक ऐतिहासिक कथा के अनुसार शालिवाहन नामक एक कुम्हार के लड़के ने मिट्टी के सैनिकों की सेना बनाई और उस पर पानी छिड़ककर उनमें प्राण फूँक दिए और इस सेना की मदद से दुश्मनों को पराजित किया। इस विजय के प्रतीक के रूप में शालिवाहन शक संवत का प्रारंभ भी माना जाता है।
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पंचांग
हिंदू पंचांग की रचना का काल
कहा जाता है कि प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री ने अपने अनुसन्धान के फलस्वरूप सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और वर्ष की गणना करते हुए भारतीय ‘पंचांग ‘ की रचना की थी।
कहा जाता है कि प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री ने अपने अनुसन्धान के फलस्वरूप सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और वर्ष की गणना करते हुए भारतीय ‘पंचांग ‘ की रचना की थी।