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वसंत पंचमी 2018: नव-सृजन का पर्व वसंत पंचमी आज

Mon, 22 Jan 2018 10:24 AM IST
प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद
प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद Updated Mon, 22 Jan 2018 10:24 AM IST
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vasant panchami 2018 festival of passion and it signifies the brilliance of nature

पतझड़ के बाद वृक्षों में नई कोपल, खेतों में स्वर्णिम आभा लिए लहलाती सरसों, वातावरण में भीनी-भीनी सुगंध, बाग-बगीचों में खिलते रंग-बिरंगे पुष्पों पर मंडराते भंवरे और पक्षियों का मधुर कलरव। यह सब ऋतुओं की रानी वसंत के आगमन के संकेत है। शीत ऋतु के बाद वसंत का जब सुहावना मौसम दस्तक देता है, तो ऐसा प्रतीत होता है, मानो प्रकृति ने नया श्रृंगार कर लिया हो। वसंतोत्सव के रूप में जाना जाने वाला वसंत एक ऐसा पर्व है, जिसमें समस्त प्राणियों के भीतर उल्लास, उमंग का संचार स्वतः ही होने लगता है। 

vasant panchami 2018 festival of passion and it signifies the brilliance of nature

देवी सरस्वती का दिन 
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, वसंत पंचमी के रूप में सर्वज्ञात है। इस दिन ज्ञान, वाणी एवं ललित कलाओं की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा-आराधना की जाती है। प्रातःकाल नित्य क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद पूरे शरीर में तेल का उबटन लगाकर स्नान के बाद बसंती रंग के वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु, शिव, गणेश और सरस्वती की पूजा करते हैं। इसके साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण, कामदेव और रति की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में पारिवारिक प्रेम, स्नेह, प्रसन्नता आदि में वृद्धि होती है। सरस्वती पूजन में पीला चंदन, पीले वस्त्र, पीले पुष्प, बेसन से बने मिष्ठान, केसर एवं हल्दी मिले हुए मीठे चावल का भोग लगाया जाता है। 

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होली का शुभारंभ 

बृज क्षेत्र में वसंत पंचमी के दिन से होली का शुभारंभ हो जाता है। चौराहों पर होलिका दहन के लिए लकड़ी एकत्र करने के बाद गुलाल उड़ाया जाता है। जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक निरंतर उल्लास के साथ चलता है। 

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अक्षर ज्ञान कराने का पावन दिन 
वसंत पंचमी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का दिन होने से वसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है। स्कूलों में सरस्वती पूजन किया जाता है तथा ज्ञान वृद्धि के लिए सरस्वती जी से कामना की जाती है। वहीँ गुरुद्वारों में इस दिन राग वसंत में गुरुवाणी के कीर्तन द्वारा श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक भावना जागृत की जाती है। वसंत पर्व ऐसा पर्व है, जो समस्त सृष्टि को नई ऊर्जा व सौंदर्य से लबरेज कर देता है। यह प्रकृति से प्रेम का पर्व है।
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प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार
नव सृजन और प्राकृतिक सुंदरता का पर्याय वसंत पंचमी अपने व्यक्तित्व को संवारने, मानसिक विकारों का परित्याग करने, प्रसन्नता, त्याग और साहस के साथ अपने अस्तित्व को बनाए रखने एवं अपनी प्रकृति के मौलिक स्वरूप को बनाए रखकर समस्त प्राणियों का कल्याण करने का संदेश देती है।

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