Teachers' Day 2020: शिक्षक दिवस हर साल 5 सितंबर को भारत के उप-राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के मौके पर शिष्य अपने गुरुजनों के प्रति समर्पण भाव को प्रकट करते हैं। सनातन परंपरा में प्राचीन काल से ही गुरुओं को सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है। शिक्षक दिवस के मौके पर आज हम 10 पौराणिक गुरुओं और उनके प्रिय शिष्यों के बारे में जानेंगे।
Teachers' Day 2020: शिक्षक दिवस पर जानिए पौराणिक कथाओं के दस महान गुरु और उनके शिष्य
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महर्षि वेदव्यास
हिन्दू धार्मिक शास्त्रों में महर्षि वेदव्यास को प्रथम गुरु माना गया है। कहते हैं महर्षि वेदव्यास स्वयं भगवान विष्णु जी के अवतार थे। इनका पूरा नाम कृष्णदै्पायन व्यास था। महर्षि वेदव्यास ने ही वेदों, 18 पुराणों और महाकाव्य महाभारत की रचना की थी। महर्षि के शिष्यों में ऋषि जैमिन, वैशम्पायन, मुनि सुमन्तु, रोमहर्षण आदि शामिल थे।
महर्षि वाल्मीकि
महर्षि वाल्मीकि ने रामायण ग्रंथ की रचना की थी। उन्हें कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का जनक माना जाता है। भगवान राम और उनके दोनों पुत्र लव-कुश महर्षि वाल्मीकि के शिष्य थे। उन्होंने जंगल में अपने आश्रम माता सीता को शरण भी दी थी।
गुरु द्रोणाचार्य
महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का वर्णन मिलता है। वे कौरवों और पांडवों के गुरु थे। हालांकि उनके प्रिय शिष्य में अर्जुन का नाम आता है। परंतु एकलव्य ने भी उन्हें अपना गुरु माना था। गुरु द्रोणाचार्य ने ही गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य से उसका अंगूठा मांग लिया था।
गुरु विश्वामित्र
रामायण काल में गुरु विश्वामित्र का वर्णन मिलता है। वे भृगु ऋषि के वंशज थे। विश्वामित्र के शिष्यों में भगवान राम और लक्ष्मण थे। विश्वामित्र ने भगवान राम और लक्ष्मण को कई अस्त्र-शस्त्रों का पाठ पढ़ाया था। कहते हैं एक बार देवताओं से नाराज होकर उन्होंने अपनी एक अलग सृष्टि की रचना कर डाली थी।