Shardiya Navratri 2025 Ashtami & Navami Date: देशभर में भक्ति-ऊर्जा का पर्व शारदीय नवरात्रि मनाया जा रहा है। मां दुर्गा की आराधना का यह विशेष अवसर 2 अक्तूबर, यानी विजयादशमी पर समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार यह समय देवी की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। इस दौरान श्रद्धालु घरों से लेकर पूजा-पंडालों में मां दुर्गा की पूरी निष्ठा और आस्था के साथ पूजा करते हैं। कई भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास भी रखते हैं और मां के सभी स्वरूपों की विधिवत आराधना करते हैं। इसके अलावा घरों में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विधान है। इस दिन कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन करते हुए भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। लेकिन इस बार अष्टमी और नवमी तिथि कब है, यह सवाल मन में बना हुआ है। ऐसे में अष्टमी-नवमी की तिथि से लेकर कन्या पूजन का मुहूर्त क्या है, यह जानते हैं।
Ashtami & Navami Dates 2025: इस बार कब है अष्टमी और नवमी ? यहां जानें सही डेट और कन्या पूजन का समय
Shardiya Navratri 2025 Ashtami & Navami Date: देशभर में भक्ति-ऊर्जा का पर्व शारदीय नवरात्रि मनाया जा रहा है। मां दुर्गा की आराधना का यह विशेष अवसर 2 अक्तूबर यानी विजयादशमी पर समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार यह समय देवी की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है।
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कब है अष्टमी और नवमी ?
इस बार अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर होगी। तिथि का समापन 30 सितंबर को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मान्यता देते हुए, दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को मान्य होगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा और यह 1 अक्तूबर को शाम में 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। ऐसे में नवमी 1 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी।
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक अष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजे से 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 10 मिनट तक है।
नवमी तिथि कन्या पूजन शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार नवमी तिथि पर कन्या पूजन सुबह 4 बजकर 53 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट तक कर सकते हैं। इसके अलावा सुबह 8 बजकर 6 मिनट से 9 बजकर 50 मिनट के बीच आप कन्या भोज कर सकते हैं। हालांकि, इस तिथि पर शाम 7 बजकर 2 मिनट तक नवमी मान्य है, तो आप अन्य समय में भी कन्या पूजन कर सकते हैं।
- कन्या पूजन के दिन सर्वप्रथम देवी दुर्गा की पूजा करें।
- माता को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाएं।
- अब घर में दो साल से नौ साल तक की कन्याओं को कन्या भोज के लिए बैठाएं।
- कन्याओं के पैर धुलाएं और उन्हें टिका लगातर हलवा, पूरी, खीर व कुछ फल देकर भोजन खिलाएं।
- अब कुछ पैसे या उपहार कन्याओं को देकर सुख-समृद्धि की कामना करें।
- अंत में कन्याओं के पैर छूएं और जाने अनजाने में हुई गलतियों की क्षमा मांगे।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।