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Shardiya Navratri 2020: ऐसा है मां का सातवां स्वरूप, जानें मां कालरात्रि की कथा

Fri, 23 Oct 2020 06:56 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Fri, 23 Oct 2020 06:56 AM IST
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7th day of navratri 2020 maa kalratri vrat katha
शारदीय नवरात्रि 2020: कालरात्रि देवी - फोटो : SELF

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। नवरात्र के पावन उत्सव में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा तभी संपन्न मानी जाती है जब तक की मां की व्रत कथा को पढ़ा या सुना नहीं जाए। आइए जानते हैं मां के इस रूप का वर्णन और मां से जुड़ी पौराणिक कथा।

7th day of navratri 2020 maa kalratri vrat katha
मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है - फोटो : self
ऐसा है मां कालरात्रि का स्वरूप

मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है। 

7th day of navratri 2020 maa kalratri vrat katha
मां काली टीवी सीरियल का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला
अपने भक्तों को देती हैं निडरता का संदेश
इस देवी के तीन नेत्र हैं। ये तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है। ये गर्दभ की सवारी करती हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी ही तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। यानी भक्तों हमेशा निडर, निर्भय रहो। 
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7th day of navratri 2020 maa kalratri vrat katha
नारद घाट पर लगेगी सात बाई सात फीट की मां काली की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
मां अपने भक्तों का करती हैं भला

बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है। इनका रूप भले ही भयंकर हो लेकिन ये सदैव शुभ फल देने वाली मां हैं। इसीलिए ये शुभंकरी कहलाईं अर्थात् इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार से भयभीत या आतंकित होने की कतई आवश्यकता नहीं। उनके साक्षात्कार से भक्त पुण्य का भागी बनता है।

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7th day of navratri 2020 maa kalratri vrat katha
मां काली की यही वह मूर्ति है जिसकी पूजा करने के लिए काेसाें दूर से लाेग मां के दरबार में अाते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
असुरी शक्तियां नाम सुनते ही हो जाती है भयभीत 

कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं। इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। 

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