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शरद पूर्णिमा: ऐसे लगाएं अमृत वाली खीर का भोग, दूर होंगी सारी परेशानियां

Thu, 05 Oct 2017 09:20 AM IST
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 05 Oct 2017 09:20 AM IST
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sharad purnima or kojagiri purnima 2017 vrat importance and it significance

आज शरद पूर्णिमा है। अश्विन माह में पड़ने वाली पू्र्णिमा का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा वाली रात को जागरण करने और रात में चांद की रोशनी में खीर रखने का विशेष महत्व होता है। इस रात को चंद्रमा अपनी पूरी सोलह कलाओं के प्रदर्शन करते हुए दिखाई देते हैं। शरद पूर्णिमा को कोजागरी या कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।



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शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। चौमासे यानि भगवान विष्णु जिसमें सो रहे होते हैं वह समय अपने अंतिम चरण में होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का चांद अपनी सभी 16 कलाओं से संपूर्ण होकर अपनी किरणों से रात भर अमृत की वर्षा करता है। ऐसे में इस रात को आसमान में खीर रखने से खीर अमृत समान होती है।

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 पौराणिक कथाओं के अनुसार शरद पूर्णिमा इसलिए भी महत्व रखती है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

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 तीसरी कथा  मां लक्ष्मी की कृपा से भी जुड़ी है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी इस रात्रि भ्रमण पर होती हैं और जो उन्हें जागरण करते हुए मिलता है उस पर वह अपनी कृपा बरसाती हैं।

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शरद पूर्णिमा के दिन सुबह अपने इष्ट देवता का ध्यान करते हुए पूजा अर्चना करनी चाहिए। शाम के समय चंद्रोदय के समय चांदी या मिट्टी से बने घी के दिये जलायें। प्रसाद के लिये घी युक्त खीर बना लें। चांद की चांदनी में इसे रखें। लगभग तीन घंटे के पश्चात माता लक्ष्मी को यह खीर अर्पित करें।
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