Sawan Ka Teesra Pradosh Vrat 2023: प्रत्येक माह में दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस समय सावन का महीना चल रहा है और इस माह का तीसरा प्रदोष व्रत आज यानी 13 अगस्त को है। इस बार अधिक मास जुड़ने से सावन करीब दो महीने का हो गया है, इसलिए इस माह में तीन प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव शंकर के साथ मां पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से भोले बाबा और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही जातकों के जीवन में खुशियां आती हैं। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से रोग, ग्रह दोष, कष्ट, पाप आदि से मुक्ति मिलती है। ऐसे में चलिए जानते हैं सावन के तीसरे प्रदोष व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त...
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Sawan Pradosh Vrat 2023: सावन का तीसरा प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि और महत्व
Sun, 13 Aug 2023 09:38 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Sun, 13 Aug 2023 09:38 AM IST
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इस दिन है सावन का तीसरा प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व
- फोटो : iStock
इस दिन है सावन का तीसरा प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व
- फोटो : istock
सावन प्रदोष व्रत तिथि
पंचांग के अनुसार 13 अगस्त को प्रदोष तिथि की शुरुआत सुबह 8 बजकर 19 मिनट से शुरू हो रही है। इसका समापन 14 अगस्त की सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर होगा।
पंचांग के अनुसार 13 अगस्त को प्रदोष तिथि की शुरुआत सुबह 8 बजकर 19 मिनट से शुरू हो रही है। इसका समापन 14 अगस्त की सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर होगा।
इस दिन है सावन का तीसरा प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व
- फोटो : iStock
प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में शिव जी की पूजा का विधान है और प्रदोष काल का समय 13 अगस्त को मिल रहा है, इसलिए इस दिन ही इस व्रत और पूजन किया जाएगा।
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प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में शिव जी की पूजा का विधान है और प्रदोष काल का समय 13 अगस्त को मिल रहा है, इसलिए इस दिन ही इस व्रत और पूजन किया जाएगा।
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इस दिन है सावन का तीसरा प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व
- फोटो : iStock
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- प्रदोष व्रत की पूजा के लिए प्रदोष काल का समय शुभ माना जाता है। इस दौरान की गईं सभी प्रकार प्रार्थनाएं और पूजा सफल मानी जाती हैं।
- ऐसे में सूर्यास्त से एक घंटे पहले भक्त स्नान करते हैं और पूजा के लिए तैयार हो जाते हैं।
- स्नान के बाद संध्या के समय शुभ मुहूर्त में पूजन आरंभ करें।
- गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें। फिर विधिपूर्वक पूजन करें।
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इस दिन है सावन का तीसरा प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व
- फोटो : istock
प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत को बहुत ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। सावन के महीने इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना करता है और प्रदोष व्रत रखता है उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को बुरे ग्रहों के प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।
प्रदोष व्रत को बहुत ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। सावन के महीने इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति सावन के महीने में भगवान शिव की उपासना करता है और प्रदोष व्रत रखता है उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को बुरे ग्रहों के प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।