Sawan 2025 Date: हिंदू धर्म में भगवान शिव को प्रेम और शक्ति के रूप में पूजा जाता है, उनकी कृपा से अकाल मृत्यु का भय समाप्त और आत्मबल और साहस मिलता है। मान्यता है कि महादेव की आराधना और उन्हें केवल और केवल जल चढ़ाने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही सभी तरह की समस्याओं से भी मुक्ति मिलती हैं।
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Sawan 2025: इस साल कब से शुरू होगा सावन ? यहां जानें तिथि और महत्व
Tue, 06 May 2025 12:01 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Tue, 06 May 2025 12:01 PM IST
सार
शिव भक्ति में लीन होने के लिए सावन माह सबसे शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार सावन भोलेनाथ का प्रिय माह है और इस महीने में पूरी सृष्टि की कमान स्वयं महादेव ही संभालते हैं। इसलिए इस अवधि में उनकी पूजा-पाठ का भव्य आयोजन किया जाता है।
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Sawan 2025 Date
- फोटो : adobe
पंचांग के मुताबिक इस साल 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त 2025 के दिन होगा।
- फोटो : freepik
कब से शुरू होगा सावन ?
पंचांग के मुताबिक इस साल 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 9 अगस्त 2025 के दिन होगा। इस दौरान सावन के पहले दिन पूर्वाषाढा नक्षत्र और वैधृति योग का निर्माण हो रहा है, जिस पर बालव व कौलव करण का संयोग रहेगा।
सावन का पहला सोमवार - 14 जुलाई 2025
- फोटो : freepik
सावन सोमवार 2025
- सावन का पहला सोमवार - 14 जुलाई 2025
- सावन का दूसरा सोमवार - 21 जुलाई 2025
- सावन का तीसरा सोमवार- 28 जुलाई 2025
- सावन का चौथा सोमवार- 4 अगस्त 2025
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सावन में महादेव की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर लें।
- फोटो : freepik
सावन पूजा-विधि
- सावन में महादेव की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर लें।
- घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- अब शिवलिंग पर गंगाजल और दूध से अभिषेक करें।
- महादेव को बेलपत्र अर्पित करें।
- इस दौरान प्रभु को धतूरा, गंगाजल, फूल, मिठाई और दूध भी चढ़ाएं।
- महादेव के मंत्र और उनके 108 नामों का जप करते रहें।
- अब शिव चालीसा पढ़ें और अंत में आरती करते हुए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
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शिव जी की आरती
- फोटो : freepik
शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।