Sankashti Chaturthi 2021: विकट संकष्टी चतुर्थी 30 अप्रैल शुक्रवार के दिन है। इस दिन गणपति महाराज की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का आशय संकट को रहने वाली चतुर्थी तिथि से है। आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व।
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Vikat Sankashti Chaturthi 2021 April: संकष्टी चतुर्थी व्रत आज, बन रहे हैं ये दो शुभ योग, जानें व्रत विधि और महत्व
Fri, 30 Apr 2021 06:55 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Fri, 30 Apr 2021 06:55 AM IST
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विकट संकष्टी चतुर्थी 2021
- फोटो : Pixabay
विकट संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त
- फोटो : Pixabay
विकट संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 29, 2021 को रात्रि 10:09 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - अप्रैल 30, 2021 को शाम 07:09 बजे
चन्द्रोदय - रात्रि 10:38 बजे
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 29, 2021 को रात्रि 10:09 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - अप्रैल 30, 2021 को शाम 07:09 बजे
चन्द्रोदय - रात्रि 10:38 बजे
विकट संकष्टी चतुर्थी 2021: पंचांग के अनुसार इस बार संकष्टी चतुर्थी पर शिव और परिघ योग रहेगा।
- फोटो : Pixabay
संकष्टी चतुर्थी पर शुभ योग
पंचांग के अनुसार इस बार संकष्टी चतुर्थी पर शिव और परिघ योग रहेगा। ये दोनों ही योग बहुत शुभ माने जाते हैं। 30 अप्रैल सुबह 08 बजकर 03 मिनट तक परिघ योग रहेगा। इसके बाद से शिव योग आरंभ हो जाएगा। यदि कोई शत्रु से संबंधित मामला हो तो परिध योग में विजय प्राप्ति होती है। शिव बहुत ही शुभ फलदायक माना जाता है।
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विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि
- फोटो : Pixabay
संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
- सबसे पहले सुबह उठें और स्नान करें।
- इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए।
- पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
- स्वच्छ आसन या चौकी पर भगवान को विराजित करें।
- भगवान की प्रतिमा या चित्र के आगे धूप-दीप प्रज्जवलित करें।
- ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः का जाप करें।
- पूजा के बाद भगवान को लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं।
- शाम को व्रत कथा पढ़कर चांद देखकर अपना व्रत खोलें।
- अपना व्रत पूरा करने के बाद दान करें।
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संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ
- फोटो : ट्विटर
संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि संकष्टी के दिन गणपति की पूजा-आराधना करने से समस्त प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है। वे अपने भक्तों की सारी विपदाओं को दूर करते हैं और उनकी मनोकामनाएं को पूर्ण करते हैं। चन्द्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है। सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है।