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सफला एकादशी 2019: भूलकर भी न करें ये गलती, जानें एकादशी व्रत विधि
Sat, 21 Dec 2019 08:58 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Sat, 21 Dec 2019 08:58 AM IST
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भगवान विष्णु
- फोटो : ANI
सफला एकादशी व्रत 22 दिसंबर 2019 को है। धार्मिक रूप से यह तिथि अति महत्वपूर्ण मानी जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, पौष माह की कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक रूप से प्रति माह को पड़ने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु जी को समर्पित होती है। इसलिए एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।
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सफला एकादशी के दिन बरतें ये सावधानी
एकादशी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन चावल और चावल से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए। दरअसल, एकादशी व्रत का शास्त्रों और पुराणों में बड़ा महत्व बताया गया है। इस व्रत को लेकर कई नियम और मान्यताएं भी हैं इनमें चावल नहीं खान भी शामिल है। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ ही साथ वैज्ञानिक कारण भी बताया जाता है।
एकादशी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन चावल और चावल से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए। दरअसल, एकादशी व्रत का शास्त्रों और पुराणों में बड़ा महत्व बताया गया है। इस व्रत को लेकर कई नियम और मान्यताएं भी हैं इनमें चावल नहीं खान भी शामिल है। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ ही साथ वैज्ञानिक कारण भी बताया जाता है।
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एकादशी व्रत कथा और नियम
धार्मिक दृष्टि से एकादशी के दिन चावल खाना अखाद्य पदार्थ अर्थात नहीं खाने योग्य पदार्थ खाने का फल प्रदान करता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी। इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया। मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और रक्त का सेवन करने जैसा है।
धार्मिक दृष्टि से एकादशी के दिन चावल खाना अखाद्य पदार्थ अर्थात नहीं खाने योग्य पदार्थ खाने का फल प्रदान करता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी। इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया। मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और रक्त का सेवन करने जैसा है।
एकादशी को इसलिए नहीं खाया जाता है चावल
वैज्ञानिक तथ्य के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। एकादशी व्रत में मन का निग्रह और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाना वर्जित कहा गया है।
वैज्ञानिक तथ्य के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। एकादशी व्रत में मन का निग्रह और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाना वर्जित कहा गया है।