आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। हमारे शास्त्रों में इस एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन लोग रात में जागरण करके शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं। देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जानते हैं। कहते हैं इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं।
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Devshayani Ekadashi 2019 : जानें आखिर एकादशी के दिन क्यों नहीं खाया जाता है चावल
Fri, 12 Jul 2019 02:54 PM IST
कशिश मिश्रा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: कशिश मिश्रा
Updated Fri, 12 Jul 2019 02:54 PM IST
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देवशयनी एकादशी
धार्मिक दृष्टि से ये चार महीने भगवान विष्णु के निद्राकाल माने जाते हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इस दौरान सूर्य व चंद्र का तेज पृथ्वी पर कम पहुंचता है, जल की मात्रा अधिक हो जाती है, वातावरण में अनेक जीव-जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जो अनेक रोगों का कारण बनते हैं। इसलिए साधु-संत, तपस्वी इस काल में एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना, स्वाध्याय व प्रवचन आदि करते हैं। इन दिनों केवल ब्रज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन महीनों में भूमण्डल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर वास करते हैं।
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देवशयनी एकादशी
इसलिए नहीं खाते एकादशी पर चावल
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी, इसलिए इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके।
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देवशयनी एकादशी
चावल न खाने का ज्योतिषीय कारण
एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिष के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। ऐसे में चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है और इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। चूंकि एकादशी व्रत में मन का पवित्र और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है, इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाने की मनाही है।
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देवशयनी एकादशी
यदि व्रत करना न संभव हो तो...
जो लोग किसी कारण से एकादशी व्रत नहीं कर पाते हैं, उन्हें श्री हरि एवं देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए एकादशी के दिन खान-पान एवं व्यवहार में सात्विकता का पालन करना चाहिए। इस दिन चावल, लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा नहीं खाएं। एकादशी के दिन किसी से झूठ या अप्रिय वचन न बोलें और प्रभु का स्मरण करें।
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