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Ratha Saptami 2025: किस दिन है रथ सप्तमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Tue, 04 Feb 2025 07:02 AM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Tue, 04 Feb 2025 07:02 AM IST
सार
माना जाता है कि रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य अपने रथ को सात घोड़ों के साथ चलाना प्रारंभ करते हैं। कहा जाता है कि इसी दिन से उन्होंने संसार को ज्ञान प्रदान करना शुरू किया था, इसलिए इसे सूर्य देव के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।
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रथ सप्तमी 2025
- फोटो : Amar Ujala
Ratha Saptami 2025 Date And Time: सनातन धर्म में रथ सप्तमी पर्व का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान सूर्य अपने रथ को सात घोड़ों के साथ चलाना प्रारंभ करते हैं। कहा जाता है कि इसी दिन से उन्होंने संसार को ज्ञान प्रदान करना शुरू किया था, इसलिए इसे सूर्य देव के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन गर्मी के आगमन का संकेतक माना जाता है और कृषि कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
खरमास 2024
- फोटो : Adobe Stock
रथ सप्तमी 2025: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
तिथि: 4 फरवरी 2025, मंगलवार
स्नान मुहूर्त: प्रातः 05:23 से 07:08 तक
अरुणोदय काल: 06:43 बजे
सूर्योदय दर्शन: 07:08 बजे
सप्तमी तिथि प्रारंभ: 4 फरवरी को प्रातः 04:37 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त: 4 फरवरी को रात्रि 02:30 बजे
तिथि: 4 फरवरी 2025, मंगलवार
स्नान मुहूर्त: प्रातः 05:23 से 07:08 तक
अरुणोदय काल: 06:43 बजे
सूर्योदय दर्शन: 07:08 बजे
सप्तमी तिथि प्रारंभ: 4 फरवरी को प्रातः 04:37 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त: 4 फरवरी को रात्रि 02:30 बजे
रथ सप्तमी पर पूजन विधि
- फोटो : Adobe Stock
रथ सप्तमी पर पूजन विधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए जल में गंगा जल, अक्षत, तिल, रोली एवं दूर्वा मिलाकर अर्पित करें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद सूर्य चालीसा, सूर्य कवच का पाठ करें और उनकी आरती उतारें। पूजा के उपरांत बहते जल में काले तिल प्रवाहित करना और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए जल में गंगा जल, अक्षत, तिल, रोली एवं दूर्वा मिलाकर अर्पित करें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का उच्चारण करें। इसके बाद सूर्य चालीसा, सूर्य कवच का पाठ करें और उनकी आरती उतारें। पूजा के उपरांत बहते जल में काले तिल प्रवाहित करना और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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रथ सप्तमी का महत्व
- फोटो : Adobe Stock
रथ सप्तमी का महत्व
इस दिन को आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से चर्म रोगों और अन्य शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह दिन दान-पुण्य के लिए भी विशेष महत्व रखता है, जिससे पूर्व जन्मों के पापों का नाश माना जाता है।
इस दिन को आरोग्य सप्तमी भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से चर्म रोगों और अन्य शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह दिन दान-पुण्य के लिए भी विशेष महत्व रखता है, जिससे पूर्व जन्मों के पापों का नाश माना जाता है।
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रथ सप्तमी पर करें ये काम
- फोटो : Adobe Stock
रथ सप्तमी पर करें ये काम
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
- सूर्योदय से पूर्व स्नान करना अनिवार्य माना गया है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर विधिवत पूजा करें।
- लाल पुष्प, धूप, कपूर एवं घी का दीप जलाकर सूर्य देव की आराधना करें।
- इस दिन महिलाएं अपने घर के आंगन में सूर्य देव के रथ का चित्र बनाकर उनका स्वागत करती हैं।
- कई स्थानों पर मिट्टी के बर्तनों में दूध रखकर सूर्य की किरणों में गर्म करने की परंपरा है, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।