फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

राधा अष्टमी 2020: कब है राधा अष्टमी, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Sun, 16 Aug 2020 07:13 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sun, 16 Aug 2020 07:13 AM IST
विज्ञापन
Radha Ashtami 2020 Date Time Worship Method and Importance
राधाष्टमी 2020(प्रतीकात्मक तस्वीर)

कृष्ण जी की प्रिय राधा रानी का जन्मोत्सव भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसे राधाअष्टमी का त्योहार कहा जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के पंद्रह दिन बाद जन्माष्टमी की तरह राधाअष्टमी का त्योहार भी मथुरा, वृंदावन और बरसाने में बड़े जोर-शोर के साथ मनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार राधा रानी के पिता नाम वृषभानु और माता का नाम किर्ति था। राधा जी स्वंय लक्ष्मी जी का अंश थी। इस बार राधा अष्टमी का त्योहार 26 अगस्त को मनाया जाएगा।  आइए जानते हैं, राधा अष्टमी का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि

Radha Ashtami 2020 Date Time Worship Method and Importance
राधाष्टमी 2020(प्रतीकात्मक तस्वीर)
राधा अष्टमी का महत्व

राधा रानी के बिना कृष्ण जी की पूजा अधूरी मानी गई है। जो लोग कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं। उन्हें राधा रानी के जन्मोत्सव पर भी व्रत अवश्य रखना चाहिए। कहा जाता है कि राधाष्टमी के व्रत के बिना कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त नहीं होता है। राधाअष्टमी के दिन राधा और कृष्ण दोनों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने वालों को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। राधा रानी को वल्लभा भी कहा जाता है। 
Radha Ashtami 2020 Date Time Worship Method and Importance
राधा-कृष्णा

राधा अष्टमी पूजा का समय

25 अगस्त को 12:21 PM से अष्टमी तिथि आरंभ होगी, जो 26 अगस्त 10:39 AM बजे तक रहेगी। राधाष्टमी का व्रत 26 अगस्त के दिन रखा जाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Radha Ashtami 2020 Date Time Worship Method and Importance
राधाष्टमी 2020(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media

राधा अष्टमी पूजा का समय विधि 

राधा अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाकर साफ वस्त्र धारण करें उसके बाद एक साफ चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उसके ऊपर भगवान श्री कृष्ण और आराध्या देवी राधा जी की प्रतिमा स्थापित करें। साथ ही कलश भी स्थापित करें। पंचामृत से स्नान करवाकर सुंदर वस्त्र पहनाकर दोनों का श्रंगार करें। कलश पूजन के साथ राधा कृष्ण की पूजा भी करें। उन्हें फल-फूल और मिष्ठान अर्पित करें।  राधा कृष्ण के मंत्रो का जाप करें, कथा सुने, राधा कृष्ण की आरती अवश्य गाएं। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed