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एकादशी : मोहिनी एकादशी आज, जानिए पूजाविधि, महत्व, कथा और मुहूर्त

Thu, 12 May 2022 07:58 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 12 May 2022 07:58 AM IST
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mohini ekadashi vrat date puja vidhi katha importance and significance
Ekadashi Vrat 2022: पुराणों के अनुसार एकादशी को ‘हरी दिन’ और ‘हरी वासर’ के नाम से भी जाना जाता है। - फोटो : अमर उजाला
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एकादशी का व्रत रखा जाता है। 12 मई, गुरुवार को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकला था तब भगवान विष्णु ने दैत्यों से इसकी रक्षा करने के लिए मोहिनी का रूप धारण किया था और सभी देवताओं को अमृतपान करवाया था। हिंदू पचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई को सुबह 9.30 बजे से है,जो अगले दिन यानी 13 मई को सुबह 6.40 बजे तक रहेगी। 
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Amalaki Ekadashi - फोटो : अमर उजाला

मोहिनी एकादशी का महत्व
इस दिन भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम एवं विष्णुजी के मोहिनी स्वरूप का पूजन-अर्चन किया जाता है। पदम् पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण,युधिष्ठिर को मोहिनी एकादशी का महत्व समझाते हुए कहते हैं कि महाराज !त्रेता युग में महर्षि वशिष्ठ के कहने से परम प्रतापी श्री राम ने इस व्रत को किया। यह व्रत सब प्रकार के दुखों का निवारण करने वाला,सब पापों को हरने वाला व्रतों में उत्तम व्रत है। इस व्रत के प्रभाव से प्राणी भगवान विष्णु की कृपा से सभी प्रकार के मोह बंधनों एवं पापों से छूट कर अंत में वैकुण्ठ धाम को जाते हैं।

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Ekadashi Upay - फोटो : अमर उजाला

पूजा-विधि
इस दिन समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान श्रीविष्णु की पूजा-अर्चना करनी  करनी चाहिए। रोली,मोली,पीले चन्दन,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतुफल,मिष्ठान आदि अर्पित कर धूप-दीप से श्री हरि की आरती उतारकर दीप दान करना चाहिए।इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' का जप एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत फलदायी है।  इस दिन भक्तों को परनिंदा, छल-कपट,लालच,द्धेष की भावनाओं से दूर  रहकर,श्री नारायण को ध्यान में रखते हुए भक्तिभाव से उनका भजन करना चाहिए ।यदि आपके लिए व्रत करना संभव नहीं है तो आप मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण करते रहें।शीतल चीजें जैसे   आम,खरबूजा,तरबूज,ककड़ी,शर्बत,ठंडाई,जल आदि का दान करें।

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Ekadashi Vrat 2022 - फोटो : अमर उजाला

मोहिनी एकादशी कथा
शास्त्रों के अनुसार,सरस्वती नदी के पास भद्रावती नाम का एक सुन्दर नगर था। राजा धृतिमान जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे,इस स्थान पर शासन करते थे। उनके पाँच पुत्र थे, जिनमें से पांचवां पुत्र जिसका नाम धृष्टबुद्धि था,बहुत बुरे कामों और अनैतिक कार्यों में शामिल होने वाला पापी था। यह सब देखकर राजा धृष्टिमन ने धृष्टबुद्धि का त्याग कर दिया। जीवित रहने के लिए,वह डकैती के कृत्यों में शामिल हो गया। परिणामस्वरूप,उसे राज्य से बाहर निकाल दिया गया। धृष्टबुद्धी एक जंगल में रहने लगा। एक बार जब वह जंगल में भटक रहा था,तो वह ऋषि कौंडिन्य के आश्रम में पहुंचा। यह वैशाख मास का समय था और ऋषि कौंडिन्य स्नान कर रहे थे। कुछ बूंदें निकल गयीं और धृष्टबुद्धि पर पड़ गयीं। इस वजह से धृष्टबुद्धि ने आत्म-साक्षात्कार और अच्छी भावना को प्राप्त किया और इस तरह उसने अपने सभी अनैतिक कार्यों पर पछतावा किया। उसने ऋषि से अपने पिछले पापों और बुरे कर्मों से मुक्ति के मार्ग की तरफ जाने के लिए मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। इसके लिए ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी व्रत का पालन करने के लिए कहा ताकि उसे पापों से छुटकारा मिल सके। एकादशी के दिन धृष्टबुद्धि ने पूरी श्रद्धा के साथ एकादशी व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप धुल गए और वह विष्णु लोक में पहुंच गया।

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