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Mahashivratri 2025: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या होता है अंतर ? यहां जानें

Wed, 12 Feb 2025 11:46 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Wed, 12 Feb 2025 11:46 AM IST
सार

हिंदू धर्म में भगवान शिव और देवी पार्वती को श्रद्धा, विश्वास, आदर्श दांपत्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। प्रतिदिन उनकी पूजा-अर्चना व ध्यान करने से साधक के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही महादेव भी प्रसन्न होते हैं।

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MahaShivratri 2025 Know difference between Shivratri and maha shivratri spiritual significance rituals
Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला

Mahashivratri 2025: हिंदू धर्म में भगवान शिव और देवी पार्वती को श्रद्धा, विश्वास, आदर्श दांपत्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। प्रतिदिन उनकी पूजा-अर्चना व ध्यान करने से साधक के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही महादेव भी प्रसन्न होते हैं। परंतु भोलेनाथ और पार्वती की विशेष कृपा पाने के लिए शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का दिन सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती की जोड़ी की उपासना करने से साधक के सभी कष्टों का निवारण होता है, साथ ही प्रेम जीवन की समस्याएं भी समाप्त होने लगती हैं।



पंचांग की मानें तो हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि है। इस दौरान कुछ लोग महाशिवरात्रि को ही शिवरात्रि कहते हैं। लेकिन ऐसा समझना उचित नहीं है। ये दो अलग-अलग त्योहार है जिनका अपना विशेष महत्व है। ऐसे में आइए इस लेख के माध्यम से शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के अंतर को जानते हैं।

MahaShivratri 2025 Know difference between Shivratri and maha shivratri spiritual significance rituals
महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर - फोटो : freepik

महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि का त्योहार साल में एक बार मनाया जाता है, जो फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पड़ता है। इस तिथि को महादेव और देवी पार्वती के विवाह की 'वैवाहिक वर्षगांठ' के रूप में मनाया जाता है, इसे शिव-पार्वती मिलन का दिन भी कहते है। वहीं शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आती है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा का विधान है। मान्यता है कि शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

MahaShivratri 2025 Know difference between Shivratri and maha shivratri spiritual significance rituals
महाशिवरात्रि तिथि 2025 - फोटो : freepik

महाशिवरात्रि तिथि 2025 
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 08 मिनट से होगी। तिथि का समापन 27 फरवरी 2025 को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
 

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MahaShivratri 2025 Know difference between Shivratri and maha shivratri spiritual significance rituals
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6: 47 मिनट से 9: 42 तक है। - फोटो : freepik
जलाभिषेक का शुभ समय
पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6: 47 मिनट से 9: 42 तक है। इसके बाद 11: 6 मिनट से 12:35 मिनट तक जलाभिषेक होगा। वहीं शाम को जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त 3:25 मिनट से 6: 8 मिनट तक।
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MahaShivratri 2025 Know difference between Shivratri and maha shivratri spiritual significance rituals
ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक - फोटो : freepik
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक
  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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