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षट्तिला एकादशी: इस दिन तिल का दान और स्नान से मिलता है पुण्य, जानिए पूरी कथा

Thu, 11 Jan 2018 10:17 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 11 Jan 2018 10:17 AM IST
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माघ का महीना चल रहा है। शास्‍त्रों में माघ का महीना भी बड़ा पुण्यदायी है। इस महीने में कृष्‍ण पक्ष की एकादशी को षट्त‌िला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी के द‌िन व्यक्त‌ि अगर त‌िल का प्रयोग 6 प्रकार से करे तो पाप कर्मों से मुक्त होकर हजारों वर्षों तक परलोक में सुख भोग प्राप्त करता है। यह पुण्य एकादशी इस बार 12 जनवरी, शुक्रवार को है।

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पद्म पुराण में भगवान व‌िष्‍णु ने नारद मुन‌ि से बताया है क‌ि षट्त‌िला एकादशी अन्न धन और सुख देने वाली है। इस एकादशी के संदर्भ में पुराण जो कथा म‌िलती है उसके अनुसार एक स्‍त्री भगवान व‌िष्‍णु में बड़ी  भक्त थी और सभी व्रत रखती थी ज‌िससे उसका शरीर तो शुद्ध हो गया था लेक‌िन कभी अन्न दान नहीं देने के कारण मृत्यु के बाद वह बैकुंठ में तो पहुंच गई लेक‌िन उसे खाली कुट‌िया म‌िली।

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स्‍त्री ने भगवान से पूछा क‌ि प्रभु बैकुंठ में आकर भी मुझे खाली कुट‌िया क्यों म‌िली है तब भगवान व‌िष्‍णु ने बताया क‌ि तुमने कभी कुछ दान नहीं क‌िया और जब मैं तुम्हारे उद्धार के ल‌िए दान मांगने तुम्हारे पास आया तो तुमने मुझे म‌िट्टी का एक ढेला पकड़ा द‌िया ज‌िससे तुम्हे यह फल म‌िला है। अब इस समस्या का एक मात्र उपाय है क‌ि तुम व‌िध‌ि पूर्वक षट्त‌िला एकादशी का व्रत करो। इस व्रत से म‌ह‌िला की कुट‌िया अन्न धन से भर गई।

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षट‍्त‌िला एकादशी के व‌िषय में बताया गया है क‌ि इस व्रत के द‌िन व्यक्त‌ि को सुबह स्नान करके भगवान व‌िष्‍णु की पूजा करनी चाह‌िए। भगवान व‌िष्‍णु को त‌िल और उड़द म‌िश्र‌ित ख‌िचड़ी का भोग लगाना चाह‌िए। इस व्रत में त‌िल का ज‌ितने अध‌िक तरीके से प्रयोग होता है उतना ही फायदेमंद होता है।

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जो लोग यह व्रत नहीं करते हैं उन्हें भी इस षट्त‌िला एकादशी के व्रत के द‌िन पानी में त‌िल डालकर स्नान करना चाह‌िए। त‌िल का उबटन लगाना चाह‌िए। त‌िल म‌िला पानी पीना चाह‌िए। त‌िल खाना चाह‌िए। त‌िल का दान करना चाह‌िए। त‌िल का हवन करना चाह‌िए और त‌िल से त‌िलक भी करना चाह‌िए। कहते हैं जो व्यक्त‌ि ज‌ितने प्रकार से इस द‌िन त‌िल का प्रयोग करता है उतने हजार वर्ष तक स्वर्ग में रहता है।

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