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करवा चौथ व्रत 2026: यहां जानें पूजा की सरल विधि, पूजन सामग्री, कथा और प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय

Tue, 27 Oct 2026 12:46 PM IST
Shaily Prakash शैली प्रकाश
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:46 PM IST
सार

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं करवा चौथ की पूजा विधि, सामग्री, व्रत कथा और चंद्रोदय का समय।

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karwa chauth 2026 puja vidhi samagri katha city wise moonrise time
करवा चौथ व्रत 2026 - फोटो : AI

29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि संपूर्ण रात्रि व्याप्त रहेगी, इसलिए इसी दिन करवा चौथ का पावन व्रत रखा जाएगा। इस दिन दिल्ली समय के अनुसार चंद्रमा का उदय रात्रि 08 बजकर 17 मिनट पर होगा। चलिए जानते हैं करवा चौथ पूजा की सामग्री, पूजन विधि, कथा और आपके शहर में चंद्रोदय का समय।



1. आवश्यक पूजन सामग्री

करवा चौथ की पूजा को पूर्ण करने के लिए निम्नलिखित पूजन सामग्री एकत्र कर लें:

  • करवा व पात्र: मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, पानी का लोटा, चलनी (छलनी)
  • पूजन सामग्री: कुंकुम, अक्षत (चावल), सिन्दूर, चंदन, हल्दी, दीपक, रुई, कपूर, अगरबत्ती, पुष्प
  • अन्न व नैवेद्य: गेहूं, शकर का बूरा, आठ पूरियों की अठावरी, शहद, कच्चा दूध, शुद्ध घी, दही, शकर, मिठाई, गंगाजल
  • सोलह श्रृंगार: चुनरी, मेहंदी, महावर, बिंदी, चूड़ी, बिछुआ, कंघा
  • स्थापना सामग्री: गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन
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करवा चौथ की सरल पूजन विधि - फोटो : freepik

2. करवा चौथ की सरल पूजन विधि

  • व्रत का संकल्प व प्रातः पूजन
  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सोलह श्रृंगार करें।
  • इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प लेकर व्रत आरंभ करें और दिनभर जलपान न करें।
  • प्रातःकाल पूजा के समय संकल्प हेतु इस मंत्र का जाप करें:
  • मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।


देव पूजन मंत्र
पूजा के दौरान निम्नलिखित देव मंत्रों का ध्यान करें:

  • पार्वती जी: ॐ शिवायै नमः
  • भगवान शिव: ॐ नमः शिवाय
  • स्वामी कार्तिकेय: ॐ षण्मुखाय नमः
  • श्री गणेश: ॐ गणेशाय नमः
  • चंद्र देव: ॐ सोमाय नमः
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वेदी स्थापना व पूजा - फोटो : Freepik

वेदी स्थापना व पूजा

  • सायंकाल में बालू या सफेद मिट्टी की वेदी अथवा लकड़ी के आसन पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश जी और चंद्र देव की स्थापना करें। (प्रतिमा न होने पर सुपारी पर कलावा/नाड़ा बांधकर देव स्वरूप स्थापित कर सकते हैं)।
  • माता पार्वती की गोद में श्री गणेश जी को विराजमान करें।
  • मां पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करके उनका श्रृंगार करें और शिव परिवार की विधि-विधान से आराधना करें।
  • कोरे करवे में पानी भरकर उसका पूजन करें तथा एक लोटा, वस्त्र व विशेष करवा दक्षिणा स्वरूप अर्पित करें।
  • इसके पश्चात् करवा चौथ की प्रामाणिक कथा अवश्य सुनें या सुनाएं।
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चंद्र दर्शन, अर्घ्य व व्रत पारण - फोटो : Adobe

चंद्र दर्शन, अर्घ्य व व्रत पारण

  • चंद्रोदय होने पर चाँद को छलनी की ओट से देखें और चंद्र देव का पूजन करें।
  • चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:
  • करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥
  • इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।
  • एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।
  • चंद्रमा पूजन एवं अर्घ्य समर्पण के उपरांत अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें।

 

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करवा चौथ व्रत कथा - फोटो : AI
करवा चौथ की व्रत कथा
एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक लाडली बहन 'करवा' थी। करवा चौथ के दिन मायके आई बहन भूख और प्यास से अत्यंत व्याकुल थी। बहन की यह स्थिति देख सबसे छोटे भाई से रहा न गया। उसने दूर पीपल के वृक्ष पर एक दीपक जलाया और उसके आगे छलनी रखकर नकली चांद बना दिया।

भाई के इस छलावे में आकर करवा ने उस नकली चांद को अर्घ्य दे दिया। जैसे ही उसने भोजन का पहला निवाला लिया, उसे छींक आई; दूसरे निवाले में बाल निकला और तीसरा निवाला मुंह में लेते ही उसके पति की मृत्यु की दुखद सूचना आ गई।

जब भाभियों से उसे सत्य पता चला कि गलत तरीके से व्रत टूटने के कारण देवता रुष्ट हो गए हैं, तो करवा ने अपने सतीत्व के बल पर पति को पुनर्जीवित करने का कठोर संकल्प लिया। वह पूरे एक वर्ष तक अपने पति के शव की सेवा-देखभाल करती रही और उसके शरीर पर उगने वाली सूई जैसी घास को चुनती रही।

अगले वर्ष पुनः करवा चौथ आने पर जब भाभियां उससे मिलने आईं, तो उसने प्रत्येक भाभी से प्रार्थना की— "यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो।" भाभियों ने टालते हुए उसे छोटी भाभी के पास जाने को कहा, क्योंकि छोटे भाई की वजह से ही उसका व्रत खंडित हुआ था।

करवा ने जब छोटी भाभी को कसकर पकड़ लिया, तो उसकी अटूट भक्ति और सतीत्व को देखकर छोटी भाभी का हृदय पिघल गया। छोटी भाभी ने अपनी छोटी उंगली चीरकर अमृत की बूंदें करवा के पति के मुंह में डाल दीं, जिससे उसका पति 'श्री गणेश-श्री गणेश' कहता हुआ पुनः जीवित हो उठा।

प्रार्थना: हे श्री गणेश एवं माता गौरी! जिस प्रकार आपने करवा को अखंड सौभाग्य का वरदान देकर उसका सुहाग लौटाया, उसी प्रकार सभी सुहागिन व्रतियों पर अपनी असीम कृपा बनाए रखना।
 
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