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Karwa Chauth 2020: 4 नवंबर को है करवाचौथ, इस मंत्र से पूजा करने पर मिलेगा सुख-सौभाग्य
अनीता जैन, वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 26 Oct 2020 05:41 AM IST
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करवा चौथ 2020
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पति-पत्नी के बीच समर्पण, प्यार और अटूट विश्वास का त्यौहार करवा चौथ इस वर्ष 4 नवंबर ,बुधवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानि करवाचौथ के दिन महिलाऐं यह व्रत अपने पति के प्रति समर्पित होकर उनके लिए उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं जन्म-जन्मांतर तक पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए मंगल कामना करती हैं। करवाचौथ का अर्थ है,'करवा' यानि कि मिट्टी का बर्तन व 'चौथ' यानि प्रथम पूज्य गणेशजी की प्रिय तिथि चतुर्थी। इस दिन मिटटी के करवा में जल भरकर पूजा में रखना बेहद शुभ माना गया है और इसी से रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
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करवा चौथ शुभ मुहूर्त
इस मंत्र से करें चंद्रमा की पूजा
नारदपुराण के अनुसार महिलाएं सोलह श्रृंगार कर सांयकाल में भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कर्तिकेय,गणेश एवं चंद्रमा का विधिपूर्वक पूजन करते हुए नैवेद्य अर्पित करें। अर्पण के समय यह कहना चाहिए कि ''भगवान कपर्दी गणेश मुझ पर प्रसन्न हों।''और रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन करके यह मंत्र पढते हुए अर्घ्य दें, मंत्र है- ''सौम्यरूप महाभाग मंत्रराज द्विजोत्तम, मम पूर्वकृतं पापं औषधीश क्षमस्व मे।अर्थात हे! मन को शीतलता पहुंचाने वाले, सौम्य स्वभाव वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ, सभी मंत्रों एवं औषधियों के स्वामी चंद्रमा मेरे द्वारा पूर्व के जन्मों में किए गए पापों को क्षमा करें।
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करवा चौथ 2020
- फोटो : अमर उजाला
मेरे परिवार में सुख शांति का वास रहे। मां पार्वती उन सभी महिलाओं को सदा सुहागन होने का वरदान देती हैं जो पूर्णतः समर्पण और श्रद्धा विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं। पति को भी चाहिए कि पत्नी को लक्ष्मी स्वरूपा मानकर उनका आदर-सम्मान करें क्यों कि एक दूसरे के लिए प्यार और समर्पण भाव के बिना यह व्रत अधूरा है।
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द्रोपदी ने भी किया व्रत
महाभारत में भी एक प्रसंग है जिसके अनुसार पांडवों पर आए संकट को दूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण के सुझाव से द्रोपदी ने भी करवाचौथ का पावन व्रत किया था। इसके बाद ही पांडव युद्ध में विजयी रहे। रामचरितमानस के लंका काण्ड के अनुसार इस व्रत का एक पक्ष यह भी है कि जो पति-पत्नी किसी कारणवश एक दूसरे से बिछुड़ जाते हैं,चंद्रमा की किरणें उन्हें अधिक कष्ट पहुंचती हैं इसलिए करवाचौथ के दिन चंद्रदेव की पूजा कर महिलाएं यह कामना करती हैं कि किसी भी कारण से उन्हें अपने प्रियतम का वियोग न सहना पड़े।
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