13 जून को कालाष्टमी पर्व है। इस दिन भैरव बाबा के लिए कालाष्टमी व्रत रखा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रति माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण काल भैरव को दंडपाणि भी कहा जाता है। कालाष्टमी के दिन भक्तों को ये 5 चमत्कारिक उपाय जरूर करने चाहिए। ऐसा करने से शत्रुओं का भय और दुर्भाग्य दूर होता है तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Kalashtami 2020: कालाष्टमी व्रत आज, संकटों से मुक्ति पाने के लिए अवश्य करें ये पांच उपाय
भगवान शिव की पूजा
कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की पूजा करने से भी भगवान भैरव का आशीर्वाद मिलता है, क्योंकि भगवान भैरव की उत्पत्ति भगवान शिव के अंश के रूप में हुई थी। कालाष्टमी के दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से 'ॐ नम: शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इस विधि से पूजन करने पर भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
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भगवान भैरव के मंदिर जाएं
कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव के मंदिर में जाकर सिंदूर, सरसों का तेल, नारियल, चना, चिरौंजी, पुए और जलेबी चढ़ाकर भक्ति भाव से पूजन करें।
काल भैरव जी को प्रसन्न करने के लिए, उनकी कृपा पाने के लिए कालाष्टमी के दिन से भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसो के तेल का दीपक जलाएं और श्रीकालभैरवाष्टकम् का पाठ करें। मनोकामना पूर्ण होने तक प्रतिदिन इस उपाय को भक्ति भाव के साथ करें।
कालाष्टमी के दिन से लेकर 40 दिनों तक लगातार काल भैरव का दर्शन करें। इस उपाय को करने से भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामना को पूर्ण करेंगे। भैरव की पूजा के इस नियम को चालीसा कहते हैं जो चन्द्रमास के 28 दिनों और 12 राशियां को जोड़कर बनता है।