Kajari Teej Puja Muhurta: हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व है, और भाद्रपद माह में आने वाली कजरी तीज भी एक ऐसा ही अत्यंत पुण्यदायी पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से सौभाग्य, प्रेम और पारिवारिक सुख-शांति की कामना के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत की शुरुआत स्वयं माता पार्वती ने की थी, और तभी से यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। विवाहित महिलाएं जहां अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख के लिए यह व्रत करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।
Kajari Teej Puja Vidhi: कजरी तीज पर करें पारंपरिक विधि से पूजन, कुंवारी कन्याओं को मिलेगा योग्य वर
Kajari Teej Auspicious Time: अगर किसी लड़की की शादी में रुकावट आ रही हो या किसी शादीशुदा महिला को वैवाहिक जीवन में परेशानी हो, तो कजरी तीज का व्रत करना लाभदायक होता है। यह व्रत शिव-पार्वती को समर्पित होता है और उनसे सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। सच्चे मन से किया गया यह व्रत विवाह से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।
- कजरी तीज के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- पूजा की सभी जरूरी सामग्रियों को एकत्र करें और व्रत का संकल्प लें।
- एक चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाकर उस पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें, जबकि मां पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएं।
- इसके बाद दीपक जलाकर पूजा करें, आरती उतारें और फिर व्रत कथा का पाठ करें।
पूजन की तैयारी कैसे करें
- इस दिन महिलाएं गोबर और मिट्टी से दीवार के पास एक छोटा तालाब बनाती हैं, जिसमें नीम की टहनी रोपते हैं। तालाब में दूध मिला जल डाला जाता है और किनारे एक दीपक जलाकर रखा जाता है।
- पूजा की थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली, चावल (अक्षत) आदि रखें। एक लोटे में कच्चा दूध भी ज़रूर लें।
- शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज माता की पूजा करती हैं।
- नीमड़ी माता को जल और रोली के छींटे देती हैं, चावल चढ़ाती हैं और दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल से 13-13 बिंदियां लगाती हैं।
- मेहंदी व रोली की बिंदी अनामिका उंगली से और काजल की बिंदी तर्जनी से लगाई जाती है।
- नीमड़ी माता को मौली, मेहंदी, काजल, ओढ़नी, फल और सत्तू अर्पित कर उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
चंद्रमा की पूजा विधि
चंद्रोदय के समय महिलाएं गेहूं के दाने और चांदी की अंगूठी हाथ में लेकर चंद्रमा की पूजा करती हैं। उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। इसके बाद किसी सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग का सामान दान कर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज व्रत का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से विवाहित महिलाओं को सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है, वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है। यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला और सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है। महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।
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