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Kajari Teej Puja Vidhi: कजरी तीज पर करें पारंपरिक विधि से पूजन, कुंवारी कन्याओं को मिलेगा योग्य वर

Sun, 03 Aug 2025 06:15 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 03 Aug 2025 06:15 AM IST
सार

Kajari Teej Auspicious Time: अगर किसी लड़की की शादी में रुकावट आ रही हो या किसी शादीशुदा महिला को वैवाहिक जीवन में परेशानी हो, तो कजरी तीज का व्रत करना लाभदायक होता है। यह व्रत शिव-पार्वती को समर्पित होता है और उनसे सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। सच्चे मन से किया गया यह व्रत विवाह से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

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Kajari Teej 2025 How to Perform Kajari Teej Puja Bring Harmony and Marital Bliss
कजरी तीज 12 अगस्त, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। - फोटो : amarujala

Kajari Teej Puja Muhurta: हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व है, और भाद्रपद माह में आने वाली कजरी तीज भी एक ऐसा ही अत्यंत पुण्यदायी पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से सौभाग्य, प्रेम और पारिवारिक सुख-शांति की कामना के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत की शुरुआत स्वयं माता पार्वती ने की थी, और तभी से यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। विवाहित महिलाएं जहां अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख के लिए यह व्रत करती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।


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साल 2025 में कजरी तीज 12 अगस्त, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को आता है, और इस दिन माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना कर व्रत रखा जाता है। उदया तिथि को मान्यता मिलने के कारण यह पर्व 12 अगस्त को ही मनाया जाएगा।  भाद्रपक्ष के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 11 अगस्त की सुबह 10.33 बजे होगा। जो 12 अगस्त की सुबह 08.40 बजे समाप्त हो जाएगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है इसलिए कजरी तीज 12 अगस्त को ही मनाई जाएगी।
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Kajari Teej 2025 How to Perform Kajari Teej Puja Bring Harmony and Marital Bliss
पूजा की सभी जरूरी सामग्रियों को एकत्र करें और व्रत का संकल्प लें। - फोटो : freepik
कजरी तीज पूजा विधि 
  • कजरी तीज के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • पूजा की सभी जरूरी सामग्रियों को एकत्र करें और व्रत का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाकर उस पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें, जबकि मां पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाएं।
  • इसके बाद दीपक जलाकर पूजा करें, आरती उतारें और फिर व्रत कथा का पाठ करें।
Kajari Teej 2025 How to Perform Kajari Teej Puja Bring Harmony and Marital Bliss
शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज माता की पूजा करती हैं। - फोटो : Instagram

पूजन की तैयारी कैसे करें

  • इस दिन महिलाएं गोबर और मिट्टी से दीवार के पास एक छोटा तालाब बनाती हैं, जिसमें नीम की टहनी रोपते हैं। तालाब में दूध मिला जल डाला जाता है और किनारे एक दीपक जलाकर रखा जाता है।
  • पूजा की थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली, चावल (अक्षत) आदि रखें। एक लोटे में कच्चा दूध भी ज़रूर लें।
  • शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज माता की पूजा करती हैं।
  • नीमड़ी माता को जल और रोली के छींटे देती हैं, चावल चढ़ाती हैं और दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल से 13-13 बिंदियां लगाती हैं।
  • मेहंदी व रोली की बिंदी अनामिका उंगली से और काजल की बिंदी तर्जनी से लगाई जाती है।
  • नीमड़ी माता को मौली, मेहंदी, काजल, ओढ़नी, फल और सत्तू अर्पित कर उनकी विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
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Kajari Teej 2025 How to Perform Kajari Teej Puja Bring Harmony and Marital Bliss
शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज माता की पूजा करती हैं। - फोटो : Instagram

चंद्रमा की पूजा विधि
चंद्रोदय के समय महिलाएं गेहूं के दाने और चांदी की अंगूठी हाथ में लेकर चंद्रमा की पूजा करती हैं। उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। इसके बाद किसी सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग का सामान दान कर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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Kajari Teej 2025 How to Perform Kajari Teej Puja Bring Harmony and Marital Bliss
शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार कर तीज माता की पूजा करती हैं। - फोटो : Instagram

कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज व्रत का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से विवाहित महिलाओं को सुखी दांपत्य जीवन और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है, वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है। यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला और सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है। महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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