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Kajari Teej 2020 Date: कब है कजरी तीज, जानें व्रत के नियम और पूजा विधि

Sun, 02 Aug 2020 06:37 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sun, 02 Aug 2020 06:37 AM IST
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Kajari Teej 2020 Know the date fasting rules and complete worship method
कजरी तीज प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

हरियाली तीज की तरह ही कजरी तीज का पर्व भी महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 6 अगस्त को मनाया जाएगा। यह पर्व उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान सहित कई राज्यों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज व सातूड़ी तीज भी कहा जाता है। जिस तरह से हरियाली तीज, हरतालिका तीज का पर्व महिलाओं को लिए बहुत मायने रखता है। उसी तरह कजरी तीज भी सुहागन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। जानें क्या है, कजरी तीज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि..

Kajari Teej 2020 Know the date fasting rules and complete worship method
कजरी तीज प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

कजरी तीज शुभ मुहूर्त 2020
कजरी तीज का त्योहार 6 अगस्त को मनाया जाएगा। पांच अगस्त को रात 10:50 मिनट पर तृतीया तिथि आरंभ हो जाएगी। जो सात अगस्त की रात 12:14 बजे तक रहेगी। 

Kajari Teej 2020 Know the date fasting rules and complete worship method
कजरी तीज प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

कैसे रखा जाता है व्रत
कजरी तीज के दिन महिलाएं नीमड़ी माता की पूजा करती हैं। यह व्रत सुहागन स्त्रियां सुख-समृद्धि की कामना के लिए करती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। गर्भवती महिलाएं जल और फलाहार ले सकती हैं। कुवांरी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। गाय की पूजा करने के बाद गाय को आटे की सात लोईयों पर गुड़ और घी रखकर खिलाया जाता है। उसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।

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Kajari Teej 2020 Know the date fasting rules and complete worship method
पूजा की विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कजरी तीज की पूजा विधि
पूजन करने के लिए मिट्टी व गोबर से दीवार के किनारे तालाब के जैसी आकृति बनाई जाती है। घी और गुड़ से पाल बांधा जाता है और उसके पास नीम की टहनी को रोपा जाता है। जो तालाब के जैसी आकृति बनाई जाती है। उसमें कच्चा दूध और जल डाला जाता है। फिर दिया प्रज्वलित किया जाता है। थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली, अक्षत आदि पूजा सामाग्री रखी जाती है। जानते हैं पूरी पूजा विधि..

सबसे पहले पूजा की शुरूआत नीमड़ी माता को जल व रोली के छींटे देने से करें। फिर अक्षत चढ़ाएं। अनामिका उंगली से नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली की 13 बिंदिया लगाएं। साथ ही  काजल की 13 बिंदी भी लगाएं, काजल की बिंदियां तर्जनी उंगली से लगाएं।  

नीमड़ी माता को मोली चढ़ाएं और उसके बाद मेहंदी, काजल और वस्त्र भी अर्पित करें। फिर उसके बाद जो भी चीजें आपने माता को अर्पित की हैं, उसका प्रतिबिंब तालाब के दूध और जल में देखें। तत्पश्चात गहनों और साड़ी के पल्ले आदि का प्रतिबिंब भी देखें। चंद्रमा को अर्ध्य देने की विधि..

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चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
कजरी तीज पर संध्या को पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है। फिर उन्हें भी रोली, अक्षत और मौली अर्पित करें। चांदी की अंगूठी और गेंहू के दानों को हाथ में लेकर चंद्रमा के अर्ध्य देते हुए अपने स्थान पर खड़े होकर परिक्रमा करें। 

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