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Janmashtami 2021: जानिए चंदन से लेकर सुदर्शन चक्र तक, भगवान श्रीकृष्ण के इन प्रतीकों का अर्थ

Mon, 30 Aug 2021 08:29 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 30 Aug 2021 08:29 AM IST
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janmashtami 2021 kanha ji loved peacock feathers keep it in house get these 5 benefits
Happy Janmashtami 2021 - फोटो : अमर उजाला

आज जन्माष्टमी का पावन त्योहार है और आधी रात को बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्माष्टमी का त्योहार भारतीय जनमानस में रचे-बसे योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।श्रीकृष्ण जन-जन के लिए ऐसे आदर्श हैं जो सभी को सुखी जीवन जीने के सूत्र सिखाते हैं। वे पाप-पुण्य, नैतिक-अनैतिक से परे पूर्ण पुरुष की अवधारणा को साकार करते हैं। श्रीकृष्ण के जीवन में संघर्ष, प्रेम, रस, विरह, कलह, युद्ध, ज्ञान, भक्ति सब कुछ समाहित है। श्रीकृष्ण के जन्म दिवस उनके गुणों को याद करने और उन्हें आत्मसात का दिन है। आइए इस पावन अवसर पर जानते है श्री कृष्ण के नौ प्रतीकों के बारे में...

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1.  चंदन
चंदन भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय है।इसके बिना इनकी पूजा पूर्ण नहीं होती। यह गोपी चंदन, हरि चंदन, सफ़ेद चंदन सहित कई प्रकार का होता है। चंदन ताजगी का प्रतीक है।
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Janmashtami - फोटो : social media
2. गोवर्धन पर्वत
श्री कृष्ण के बृज में स्थित गोवर्धन पर्वत उठाए स्वरुप की पूजा-अर्चना की जाती है। गोवर्धन पर्वत को भक्तजन गिरिराज जी भी कहते हैं। ये भगवान से सरंक्षण पाने का प्रतीक है।
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3. रासलीला
भगवान का यह स्वरूप मन को सकारात्मक ऊर्जा से भरने वाला एवं आनंद देने वाला है। इस रूप के दर्शन मात्र से समस्त चिंताएं दूर होती हैं। अतः ये आनंद का प्रतीक है।
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बांसुरी के वास्तु उपाय
4. बांसुरी
सर्वप्रथम नंदबाबा ने अपने कान्हा के लिए बांसुरी लेकर दी थी। श्री कृष्ण हर पल प्रेम और शांति का संदेश देने वाली बांस की बांसुरी को अपने साथ रखते हैं। बांसुरी सम्मोहन, ख़ुशी, आकर्षण व मन की शांति का प्रतीक मानी गई है।
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