कान्हा का जन्मदिन रात में मनाया जाता है, क्योंकि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात में उनका जन्म हुआ था। 12 बजते ही हर मंदिर, हर घर से पूजा अर्चना की आवाजें आना शुरू हो जाती है। अंधेरी रात में कान्हा के जन्मदिन के जश्न में चगमका उठता है। देश में हर छोटे-बड़े मंदिर को सजाया जाता है। आधी रात को जब गोपाला आते हैं तो उनका दूध से अभिषेक किया जाता है, लेकिन 3 ऐसे मंदिर है जहां कृष्णा का अभिषेक रात में न होकर दिन में ही किया जाता है। ये दिनों ही मंदिर है वृंदावन में, जहां कृष्णा के बाल रूप की पूजा की जाती है।
Janmashtami 2017: यहां दिन में होता है कान्हा का अभिषेक, पीछे है सदियों पुराना कारण
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
Updated Tue, 15 Aug 2017 02:43 PM IST
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