फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Holi 2021: 29 मार्च को होली पर विशेष योग, जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और पौराणिक मान्यताएं

Tue, 16 Mar 2021 07:43 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 16 Mar 2021 07:43 AM IST
विज्ञापन
holi 2021 date time holika dahan shubh muhurat timing 2021 and holi story
होली 2021 - फोटो : अमर उजाला

Holi 2021 Date: इस साल होली पर विशेष योग का निर्माण हो रहा है, जिससे होली का महत्व बढ़ रहा है। होली हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस साल होली के दिन ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में गोचर कर रहा होगा। जबकि मकर राशि में शनि और गुरु विराजमान होंगे। शुक्र और सूर्य मीन राशि में रहेंगे। मंगल और राहु वृषभ राशि, बुध कुंभ राशि और मोक्ष के कारण केतु वृश्चिक राशि में विराजमान होंगे।



शुभ मुहूर्त- फाल्गुन पूर्णिमा 2021
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – मार्च 28, 2021 को 03:27 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – मार्च 29, 2021 को 00:17 बजे
होलिका दहन 2021
होलिका दहन मुहूर्त – 18:37 से 20:56
अवधि – 02 घंटे 20 मिनट

holi 2021 date time holika dahan shubh muhurat timing 2021 and holi story
होलाष्टक 2021 - फोटो : अमर उजाला

होली वसंत ऋतु में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। वस्तुतः यह रंगों का त्योहार है। यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहला दिन होलिका दहन किया जाता है उसके दूसरे दिन रंग खेला जाता है। फाल्गुन मास में मनाए जाने के कारण होली को फाल्गुनी भी कहते हैं।

होलाष्टक से जुड़ी मान्यताओं को भारत के कुछ भागों में ही माना जाता है। इन मान्यताओं का विचार सबसे अधिक पंजाब में देखने में आता है। होली के रंगों की तरह होली को मनाने के ढंग में विभिन्न है। होली उत्तरप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडू, गुजरात, महाराष्ट्र, उडिसा, गोवा आदि में अलग ढंग से मनाने का चलन है। देश के जिन प्रदेशों में होलाष्टक से जुड़ी मान्यताओं को नहीं माना जाता है उन सभी प्रदेशों में होलाष्टक से होलिका दहन के मध्य अवधि में शुभ कार्य करने बन्द नहीं किए जाते है।

holi 2021 date time holika dahan shubh muhurat timing 2021 and holi story
होलिका पूजन - फोटो : अमर उजाला

होलिका पूजन करने के लिये होली से आठ दिन पहले होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखे उपले, सूखी लकडी, सूखी खास व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है। जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक प्रारम्भ का दिन भी कहा जाता है। जिस गांव, क्षेत्र या मौहल्ले के चौराहे पर पर यह होली का डंडा स्थापित किया जाता है वहां होली का डंडा स्थापित होने के बाद संबन्धित क्षेत्र में होलिका दहन होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता है।सबसे पहले होलाष्टक शुरु होने वाले दिन होलिका दहन के स्थान का चुनाव किया जाता है। इस दिन इस स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर, इस स्थान पर होलिका दहन के लिये लकड़ियां एकत्र करने का कार्य किया जाता है। इस दिन जगह-जगह जाकर सूखी लकड़ियां विशेषकर ऐसी लकड़ियां जो सूखने के कारण स्वयं ही पेड़ों से टूटकर गिर गई हों, उन्हें चौराहे पर एकत्र कर लिया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
holi 2021 date time holika dahan shubh muhurat timing 2021 and holi story
हैप्पी होली - फोटो : पेक्सेल्स

होलाष्टक से लेकर होलिका दहन के दिन तक प्रतिदिन इसमें कुछ लकड़ियां डाली जाती है। इस प्रकार होलिका दहन के दिन तक यहां लकड़ियों का बड़ा ढे़र बन जाता है। इस दिन से होली के रंग फिजाओं में बिखरने लगते है अर्थात होली की शुरुआत हो जाती है। बच्चे और बड़े इस दिन से हल्की फुलकी होली खेलनी प्रारम्भ कर देते हैं। होलाष्टक से मिलती जुलती होली की एक परम्परा राजस्थान के बीकानेर में देखने में आती है। पंजाब की तरह यहां भी होली की शुरुआत होली से आठ दिन पहले हो जाती है। फाल्गुन मास की सप्तमी तिथि से ही होली शुरू हो जाती है, जो धूलैण्डी तक रहती है। राजस्थान के बीकानेर की यह होली भी अंदर मस्ती, उल्लास के साथ साथ विषेश अंदाज समेटे हुए हैं। इस होली का प्रारम्भ भी होलाष्टक में गडने वाले डंडे के समान ही चौक में खम्भ पूजने के साथ होता है।

विज्ञापन
holi 2021 date time holika dahan shubh muhurat timing 2021 and holi story
होली - फोटो : अमर उजाला

होली और होलिका से संबंधित प्रचलित कथा
होली पर्व से जुड़ी हुई अनेक कहानियां हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की है। प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के अहंकार में वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। उसने अपने राज्य में भगवान के नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी।

हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से नाराज होकर हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र को अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग कभी भी नहीं छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में जल नहीं सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आदेश का पालन हुआ परन्तु आग में बैठने पर होलिका तो आग में जलकर भस्म हो गई,परन्तु प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ।

अधर्म पर धर्म की, नास्तिक पर आस्तिक की जीत के रूप में भी देखा जाता है। उसी दिन से प्रत्येक वर्ष ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में होलिका जलाई जाती है। प्रतीक रूप से यह भी माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed