सारनाथ में जिस बोधिवृक्ष के दर्शन करने और उसके पत्तों को छू कर आती हुई हवाओं के स्पर्श को महसूस करने प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं, वह अपनी पीढ़ी का चौथा पेड़ है। बुद्ध ने जिस वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था, उस बोधिवृक्ष को पिछले करीब ढाई हजार साल में तीन बार नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह कोशिश नाकाम रही। बार बार की उस कोशिश के बावजूद पीपल का वह पेड़ नया अवतार लेता गया, यों भी कह सकते हैं कि बना रहा। मौजूदा बोधिवृक्ष अपनी पीढ़ी का चौथा वृक्ष है। यह 134 साल पुराना है।
कई बार नष्ट हुआ फिर भी सलामत है महात्मा बुद्ध का बोधिवृक्ष।
भिक्षु धर्मरक्षित
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:37 PM IST
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जब पहली बार नष्ट किया गया बोधिवृक्ष
बंगाल से आया था बोधि वृक्ष का दूसरा शत्रु
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