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Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर इस बार विशेष संयोग में व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

Mon, 18 Aug 2025 06:28 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 18 Aug 2025 06:28 PM IST
सार

Bhadrapad Month: हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और देवी पार्वती की पूजा से जुड़ा होता है।
 

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Hartalika Teej 2025 Muhurat Importance Timings and Significance of the Festival
hartalika teej - फोटो : amarujala
Hartalika Teej 2025: हिंदू धर्म में हर पर्व का अपना विशिष्ट महत्व होता है, जो धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से जीवन को समृद्ध बनाता है। करवा चौथ, हरियाली तीज और कजरी तीज की तरह ही हरतालिका तीज का व्रत भी खास स्थान रखता है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, सुख-शांति और वैवाहिक जीवन में समृद्धि के लिए रखा जाता है। पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ विधिपूर्वक व्रत रखकर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं, जिससे जीवन और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।

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वर्ष 2025 में यह व्रत 26 अगस्त, मंगलवार को रहेगा। ज्योतिष के अनुसार इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे पूजा-अर्चना का फल और भी अधिक माना गया है। महिलाएँ इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शंकर तथा माता पार्वती को भोग अर्पित करें। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखेंगी, जबकि कुंवारी कन्याएँ उत्तम वर प्राप्ति के लिए इसे करेंगी। हरतालिका तीज भक्ति, समर्पण और परिवारिक सौहार्द का प्रतीक है।
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Hartalika Teej 2025 Muhurat Importance Timings and Significance of the Festival
हरतालिका तीज पर शुभ योग - फोटो : Instagram

हरतालिका तीज 2025 की तिथि
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि प्रारंभ: 25 अगस्त, दोपहर 12:35 बजे
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि समाप्त: 26 अगस्त, दोपहर 1:55 बजे

Hartalika Teej 2025 Muhurat Importance Timings and Significance of the Festival
हरतालिका तीज पर शुभ योग - फोटो : Instagram

हरितालिका तीज 2025 का शुभ मुहूर्त
हरितालिका तीज 2025 का शुभ मुहूर्त सुबह 5:56 बजे से शुरू होकर 8:31 बजे तक रहेगा। इस अवधि को पूजा-अर्चना और व्रत के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस दो घंटे 35 मिनट के समय में महिलाएं विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं। इस दौरान किए गए व्रत और आराधना का फल अधिक माना जाता है। शुभ मुहूर्त के समय में किए गए पूजा कर्म से पति की लंबी आयु, वैवाहिक सुख, सौभाग्य और घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह समय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है, इसलिए कोशिश करें कि पूजा के दौरान सभी विधियों का पालन पूरी श्रद्धा और सतर्कता के साथ किया जाए।

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Hartalika Teej 2025 Muhurat Importance Timings and Significance of the Festival
हरतालिका तीज पर शुभ योग - फोटो : Instagram

हरतालिका तीज पर शुभ योग 
हरतालिका तीज 2025 पर शुभ योगों का संयोजन इस व्रत को और भी विशेष बना रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार कई वर्षों बाद यह अवसर बन रहा है, जब महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। इस योग के प्रभाव से पूजा-अर्चना और व्रत के दौरान आर्थिक समृद्धि, वैवाहिक सुख और घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति के योग बनते हैं। इसके अलावा, हस्त नक्षत्र में संध्या और शुभ योग भी बन रहे हैं, जो व्रत और पूजा के फलों को कई गुना बढ़ा देते हैं। इस समय किया गया पूजा कर्म विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु महिलाएं विधिपूर्वक भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर सकती हैं। यह अवसर धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है।

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Hartalika Teej 2025 Muhurat Importance Timings and Significance of the Festival
हरतालिका तीज पर शुभ योग - फोटो : Instagram

हरतालिका तीज से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

  • हरतालिका तीज का पर्व तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसकी प्रमुख देवी पार्वती मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहले देवी पार्वती ने ही यह व्रत किया था। उनका उद्देश्य भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करना था। इस कामना को पूरा करने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर शिव जी ने पार्वती को मनचाहा वर दिया। इसके बाद उनका विवाह सम्पन्न हुआ।
  • हरतालिका तीज के दिन दिनभर में पाँच पहर पूजा-अर्चना का विधान है। व्रत के अगले दिन चतुर्थी की सुबह, महिलाएं बालूरेत से बने शिव, पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों की पूजा करती हैं और फिर उन्हें नदी, तालाब या किसी अन्य जलस्रोत में विसर्जित किया जाता है। इसके बाद दान-पुण्य किया जाता है और महिलाएं अन्न-जल ग्रहण करती हैं।
  • इस दिन शिव-पार्वती के मंदिरों में दर्शन-पूजन करना शुभ माना जाता है। शिवलिंग का जलाभिषेक करें, बिल्व पत्र चढ़ाएं, चंदन का लेप करें, हार-फूल से श्रृंगार करें, धूप-दीप जलाकर आरती करें और अंत में मिठाई का भोग अर्पित करें।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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