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राधा अष्टमी आज: जानिए राधा रानी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, महत्व और पूजा विधि
Sat, 19 Sep 2026 05:42 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 19 Sep 2026 05:42 AM IST
सार
हिंदू पंचांग अनुसार, राधा रानी का प्राकट्य भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष को दोपहर के समय हुआ था, ऐसे में इस दिन राधा रानी के लिए पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त दोपहर को माना जाता है।
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राधा अष्टमी का क्या है धार्मिक महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
19 सितंबर, शनिवार को राधा अष्टमी का त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान कृष्ण और राधा रानी के भक्तों के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन व्रत रखते हुए राधा रानी का जन्मोत्सव बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने, राधा रानी का श्रृंगार करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। आइए जानते हैं आज राधा अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और इसका महत्व।
राधा अष्टमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग अनुसार, राधा रानी का प्राकट्य भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष को दोपहर के समय हुआ था, ऐसे में इस दिन राधा रानी के लिए पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त दोपहर को माना जाता है। ऐसे में 19 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त का समय सबसे अच्छा रहेगा। 19 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से लेकर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। ऐसे में राधा रानी की पूजा का सबसे अच्छा और सर्वोत्तम समय अभिजीत मुहूर्त रहेग। इस तरह से राधा रानी की पूजा के लिए कुल 49 मिनट का समय सबसे शुभ रहेगा।
राधा अष्टमी कैसे करें राधा रानी की पूजा
आज यानी शनिवार के दिन सबसे पहले जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और चौकी पर लाल या पीला रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद राधा रानी की मूर्ति को स्थापित करें और पंचामृत से अभिषेक करें. इसके साथ ही भगवान कृष्ण की मूर्ति रखें उनका भी विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन करें। अभिषेक के बाद राधा रानी का श्रृंगार करके सुंदर वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। फिर धूप, दीप, फल, फूल अर्पित करें और राधा रानी को भोग में माखन मिश्री, मालपुआ, धनिया पंजीरी और खीर का भोग लगाएं। अंत में राधा अष्टमी व्रत कथा का पाठ और आरती करें।
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श्री राधाजी की आरती
आरती राधाजी की कीजै।
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती...
कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती...
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै। आरती...
प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै। आरती...
दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।
आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती...
दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै। आरती...
निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै...।
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राधा अष्टमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग अनुसार, राधा रानी का प्राकट्य भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष को दोपहर के समय हुआ था, ऐसे में इस दिन राधा रानी के लिए पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त दोपहर को माना जाता है। ऐसे में 19 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त का समय सबसे अच्छा रहेगा। 19 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से लेकर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। ऐसे में राधा रानी की पूजा का सबसे अच्छा और सर्वोत्तम समय अभिजीत मुहूर्त रहेग। इस तरह से राधा रानी की पूजा के लिए कुल 49 मिनट का समय सबसे शुभ रहेगा।
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राधा अष्टमी कैसे करें राधा रानी की पूजा
आज यानी शनिवार के दिन सबसे पहले जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और चौकी पर लाल या पीला रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद राधा रानी की मूर्ति को स्थापित करें और पंचामृत से अभिषेक करें. इसके साथ ही भगवान कृष्ण की मूर्ति रखें उनका भी विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन करें। अभिषेक के बाद राधा रानी का श्रृंगार करके सुंदर वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। फिर धूप, दीप, फल, फूल अर्पित करें और राधा रानी को भोग में माखन मिश्री, मालपुआ, धनिया पंजीरी और खीर का भोग लगाएं। अंत में राधा अष्टमी व्रत कथा का पाठ और आरती करें।
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श्री राधाजी की आरती
आरती राधाजी की कीजै।
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती...
कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती...
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै। आरती...
प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै। आरती...
दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।
आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती...
दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै। आरती...
निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै...।