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Govardhan Puja Rituals: गोवर्धन पूजा के बाद गोबर न फेंकें, वरना हो सकता है अशुभ

Tue, 21 Oct 2025 01:52 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 21 Oct 2025 01:52 PM IST
सार

Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पर्वत गोबर से बनता है, इसे पूजा के बाद कूड़े में फेंकना अशुभ माना जाता है। इसे आंगन में रखें, लिपाई करें या खाद के रूप में उपयोग करें।

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Govardhan Puja Rituals After Govardhan Puja, Don’t Throw Away the Cow Dung in hindi
गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन बलिप्रतिपदा को मनाया जाता है। - फोटो : amar ujala

Why Is Govardhan Parvat Made Of Gobar: दीपावली के पांच दिवसीय पर्वों में से एक महत्वपूर्ण दिन गोवर्धन पूजा का होता है, जिसे दीपावली के अगले दिन बलिप्रतिपदा को मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य लीला की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने इंद्र का घमंड तोड़ते हुए गोवर्धन पर्वत उठाकर वृजवासियों की रक्षा की थी। इस दिन श्रद्धालु गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाते हैं और विधिपूर्वक श्रीकृष्ण की पूजा कर उन्हें 56 भोग अर्पित करते हैं। यह पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को विशेष धार्मिक महत्व रखती है।


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हालांकि पूजा विधि तो सभी जानते हैं, लेकिन एक सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देता है। पूजा के बाद गोबर का क्या किया जाए? कई लोग इसे बेकार समझकर इधर-उधर फेंक देते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना अशुभ माना जाता है। इस लेख में जानिए कि गोवर्धन पूजा के बाद गोबर का क्या करें और इसके पीछे की धार्मिक और पर्यावरणीय सोच क्या है।
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Govardhan Puja Rituals After Govardhan Puja, Don’t Throw Away the Cow Dung in hindi
इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्तूबर  2025, दिन बुधवार को मनाई जाएगी। - फोटो : स्वयं

गोवर्धन पूजा 2025 में कब है?
पंचांग के अनुसार, इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्तूबर  2025, दिन बुधवार को मनाई जाएगी। इसे अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। देशभर में यह पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी ब्रज क्षेत्र में इसका विशेष महत्व होता है। वहां यह पर्व बेहद उत्साह, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाज़ों के साथ मनाया जाता है।

Govardhan Puja Rituals After Govardhan Puja, Don’t Throw Away the Cow Dung in hindi
पूजा के बाद इसे कचरे में या किसी अपवित्र स्थान पर फेंकना अशुभ माना जाता है। - फोटो : स्वयं

पूजा के गोबर को इधर-उधर फेंकने की गलती न करें
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा में उपयोग किए गए गोबर का विशेष महत्व होता है। इसलिए पूजा के बाद इसे कचरे में या किसी अपवित्र स्थान पर फेंकना अशुभ माना जाता है। जब आपकी पूजा पूरी हो जाए, तो गोवर्धन पर्वत को पूरे दिन उसी स्थान पर बना रहने दें। शाम के समय इसे सावधानी से इकट्ठा करें और एक साफ-सुथरी जगह पर रखें।
इस गोबर में करवा चौथ में प्रयुक्त सफेद सींकें लगाएं और फिर इसके ऊपर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद इस गोबर को घर के आंगन या किसी पवित्र स्थान पर सुरक्षित रूप से रख दें। ऐसा करने से न सिर्फ धार्मिक परंपरा का पालन होता है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और शुभता भी घर में बनाए रखता है।

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Govardhan Puja Rituals After Govardhan Puja, Don’t Throw Away the Cow Dung in hindi
पूजा के बाद गोवर्धन के गोबर से करें ये उपयोगी काम

पूजा के बाद गोवर्धन के गोबर से करें ये उपयोगी काम
आंगन या छत की लिपाई करें: पूजा के बाद बचे गोबर से घर के आंगन या छत की लिपाई करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी का वास होता है और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है। इससे घर का वातावरण भी पवित्र और सकारात्मक बना रहता है।
उपले (कंडे) बनाएं: बचे हुए गोबर से महिलाएं उपले बना सकती हैं, जिन्हें सर्दियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ये उपले न केवल खाना पकाने में काम आते हैं, बल्कि घर में जलाकर वातावरण को भी शुद्ध किया जा सकता है।
खेतों में खाद के रूप में उपयोग करें: यदि आप ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं या खेती करते हैं, तो इस गोबर को खेतों में डालें। यह प्राकृतिक खाद का काम करता है, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और फसल की पैदावार में भी सुधार होता है।
पौधों और गमलों में डालें: शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस गोबर का उपयोग गमलों या किचन गार्डन में कर सकते हैं। यह पौधों के लिए एक बेहतरीन जैविक खाद है, जिससे पौधे स्वस्थ और हरे-भरे रहते हैं। चाहें तो इस गोबर को स्थानीय गोशालाओं को भी दान कर सकते हैं, जहां इसका बेहतर उपयोग किया जाएगा।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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