पुराणों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, हस्त नक्षत्र में गंगाजी शिवजी की जटाओं से निकलकर धरती पर आई थी। मान्यता है कि इस दिन गंगा सेवन यानी गंगा स्नान करने से अनजाने में हुए पाप और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इस पवित्र नदी में स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। कोरोना संक्रमण काल में आप गंगा स्नान के लिए घर पर नहाने वाले जल में गंगा जल की कुछ बूंदे मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी गंगा स्नान के बराबर ही पुण्य मिलता है। इस दिन विष्णुपदी, पुण्यसलिला माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ, अतः यह दिन 'गंगा दशहरा' (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) या लोकभाषा में जेठ का दशहरा के नाम से जाना जाता है।
Ganga Dussehra 2021: जानिए वे कौन से दस पाप है जो गंगाजी की पूजा और स्नान करने से हो जाते हैं नष्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विष्णु पुराण में लिखा है कि गंगा का नाम लेने, सुनने, उसे देखने, उसका जल पीने, स्पर्श करने, उसमें स्नान करने तथा सौ योजन (कोस) से भी गंगा नाम का उच्चारण करने मात्र से मनुष्य के तीन जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। मत्स्य, गरुड़ और पद्म पुराण के अनुसार हरिद्वार, प्रयाग और गंगा के समुद्र संगम में स्नान करने से मनुष्य मरने के बाद स्वर्ग पहुंच जाता है और फिर कभी पैदा नहीं होता यानी उसे निर्वाण की प्राप्ति हो जाती है।
दस पापों से मिलती है मुक्ति
शास्त्रों के अनुसार गंगा अवतरण के इस पावन दिन गंगा जी में स्नान एवं पूजन-उपवास करने वाला व्यक्ति दस प्रकार के पापों से छूट जाता है। बिना दी हुई वस्तु को लेना, निषिद्ध हिंसा, परस्त्री संगम-यह तीन प्रकार का दैहिक पाप माना गया है। कठोर वचन मुँह से निकालना, झूठ बोलना, सब ओर चुगली करना एवं वाणी द्वारा मन को दुखाना ये वाणी से होने वाले चार प्रकार के पाप हैं। दूसरे के धन को लेने का विचार करना, मन से किसी का बुरा सोचना और असत्य वस्तुओं में आग्रह रखना-ये तीन प्रकार के मानसिक पाप कहे गए हैं। यानि कि दैहिक, वाणी द्वारा एवं मानसिक पाप, ये सभी गंगा दशहरा के दिन पतितपावनी गंगा स्नान से धुल जाते हैं।गंगा में स्नान करते समय स्वयं श्री नारायण द्वारा बताए गए मन्त्र-''ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः'' का स्मरण करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है।
दस-दस सामग्री का महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालुजन दस-दस सुगंधित पुष्प,फल,नैवेद्य,दस दीप और दशांग धूप के द्वारा श्रद्धा और विधि के साथ दस बार गंगाजी की पूजा करें। जिस भी वस्तु का दान करें, उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें, उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए, ऐसा करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है एवं माँ गंगा प्रसन्न होकर मनुष्य को पाप मुक्त करती हैं। दक्षिणा भी दस ब्राह्मणों को देनी चाहिए। जब गंगा नदी में स्नान करें, तब दस बार डुबकी लगानी चाहिए।