फाल्गुन माह का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार, 20 फरवरी को है। इस बार गुरूवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने में दो बार होता है, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। यह व्रत त्रोयदशी तिथि के दिन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। आइए, अब जानते हैं इस व्रत के बारे में सबकुछ...
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Pradosh Vrat: 20 फरवरी को प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व
Tue, 18 Feb 2020 07:29 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Tue, 18 Feb 2020 07:29 PM IST
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pradosh vrat
व्रत विधि
- नित्य कार्यों से निर्वित होकर स्नान करें।
- स्नान करने के बाद भगवान का ध्यान करें और व्रत का संकल्प करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव की पूजा करें।
- पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए।
- भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें पुष्प अक्षत्, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, गाय का दूध, धूप आदि अर्पित करें।
- ओम नम: शिवाय का जप करें।
- शिव चालीसा और आरती करें।
- पूजा संपूर्ण होने के बाद प्रसाद सभी में बांट दें।
प्रदोष व्रत पूजा समय
- प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का विशेष महत्व होता है।
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प्रदोष व्रत के लाभ
- इस व्रत के करने से भगवान शिव खुश होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
- भगवान शिव की कृपा से तमाम तरह के कष्टों और दुखों से छुटकारा मिल जाता है।
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मान्यता यह भी है कि प्रदोषकाल में भगवान शिव कैलास पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। ऐसे में इस पावन तिथि पर भोलेनाथ की साधना करने से वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों को धन-धान्य से परिपूर्ण करते हैं। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है। गुरूवार के दिन किए जाने वाले व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन शत्रुओं पर विजय पाने और उनके नाश के लिए इस पावन व्रत को किया जाता है।