Dwadashi Shradh Date,Shubh Muhurat: पितृपक्ष अब समाप्ति की कगार पर है। आज यानी 11 अक्टूबर को श्राद्ध पक्ष की द्वादशी तिथि पड़ेगी। इसके अनुसार आज यानी 11 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध किया जाएगा। ये श्राद्ध उन लोगों के लिए किया जाता है जिनके परिजनों की मृत्यु इसी तिथि पर हुई थी। इस दिन शुक्ल और कृष्ण दोनों की पक्षों की द्वदशी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है। इसके साथ ही जिन लोगों ने मृत्यु से पहले सन्यास धारण किया था उन महात्माओं का भी द्वादशी तिथि पर श्राद्ध किया जाता हैं। आइए जानते हैं द्वादशी श्राद्ध के लिए सही समय, शुभ मुहूर्त और विधि के बारे में।
Dwadashi Shradh: आज है द्वादशी श्राद्ध,संन्यासियों के लिए क्यों ख़ास है ये तिथि? जानें तर्पण मुहूर्त और विधि
द्वादशी तिथि
द्वादशी तिथि प्रारम्भ: अक्टूबर 10,2023 दोपहर 03:08 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त: अक्टूबर 11,2023 सायं 05:37 बजे तक
उदयातिथि के अनुसार 11 अक्तूबर को द्वादशी तिथि मान्य होगी।
द्वादशी श्राद्ध बुधवार- अक्टूबर 11, 2023
कुतुप मूहूर्त- 11 अक्तूबर, दोपहर 12:02से दोपहर 12:49 तक
कुल अवधि- 47 मिनट
रौहिण मूहूर्त- 11 अक्तूबर, दोपहर 12:49 से दोपहर 01:36 तक
कुल अवधि - 47 मिनट
अपराह्न काल- 11 अक्तूबर,दोपहर 01:36 से दोपहर 03:57 तक
कुल अवधि- 02 घण्टे 22 मिनट
सन्यासियों के लिए द्वादशी श्राद्ध का महत्व
द्वादशी तिथि पर परिवार के उन लोगों का श्राद्ध किए जाने का विधान है जिन्होंने संन्यास लिया हो। इस दिन पितृगणों के अलावा साधुओं व संन्यासियों का भी श्राद्ध किया जाता है। यह श्राद्ध मूलतः उन पितृगणों के निमित किया जाता है जिन्होनें अपने जीवन में सन्यास का मार्ग धारण किया हो अथवा जो सन्यास आश्रम की ओर अग्रसर हुए हों।
- शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि के श्राद्धकर्म में सात ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है।
- सर्वप्रथम नित्यकर्म से निवृत होकर घर की दक्षिण दिशा में सफेद वस्त्र बिछाएं।
- पितृगण के चित्र अथवा प्रतीक हरे वस्त्र पर स्थापित करें।
- पितृगण के निमित, तिल के तेल का दीपक जलाएं,धूप करें,जल में चंदन और तिल मिलाकर तर्पण करें।
- इसके बाद चंदन और तुलसी पत्र समर्पित करें।
- इसके उपरांत ब्राह्मणों को मखाने की खीर,पूड़ी,सब्जी,लौंग-ईलायची तथा मिश्री अर्पित करें।
- भोजन के बाद सभी को यथाशक्ति वस्त्र,धन दक्षिणा देकर उनको विदा करें।