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Sarva Pitru Amavasya 2023: ये है सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण का शुभ मुहूर्त, इन लोगों का करें श्राद्ध कर्म

Fri, 13 Oct 2023 12:25 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 13 Oct 2023 12:25 AM IST
सार

सर्वपितृ अमावस्या को महालया अमावस्या, पितृ अमावस्या या पितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या पर किन लोगों का श्राद्ध करना चाहिए और इसके साथ ही जानें तर्पण का शुभ मुहूर्त 
 

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Sarva Pitru Amavasya 2023 Know the date and shubh muhurat of Shradh tarpan in hindi
Sarva Pitru Amavasya 2023 - फोटो : amar ujala

विस्तार

Sarva Pitru Amavasya 2023 Date: पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष, हिंदू अनुष्ठानों के अनुसार पूर्वजों को समर्पित एक अवधि है। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष की 15 दिनों की अवधि के दौरान, पूर्वज पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। इसीलिए इस दौरान दिवंगत आत्मा के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है। 29 सितंबर से पितृ पक्ष प्रारंभ हो गए हैं और 14 अक्टूबर को समाप्त होंगे। 14 अक्टूबर यानी अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन होता हैं इसे सर्व पितृ अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। इस दिन पितरों के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। सर्वपितृ अमावस्या को महालया अमावस्या, पितृ अमावस्या या पितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या पर किन लोगों का श्राद्ध करना चाहिए और इसके साथ ही जानें तर्पण का शुभ मुहूर्त। 

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सर्वपितृ अमावस्या पर इस शुभ मुहूर्त में करें तर्पण 
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आरंभ:  13 अक्टूबर 2023, रात्रि 09: 50 मिनट पर 
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि समाप्त: 14 अक्टूबर 2023, रात्रि 11:24 मिनट पर 
उदया तिथि के अनुसार इस साल सर्व पितृ अमावस्या 14 अक्टूबर 2023 को मनाई जाएगी। सर्वपितृ अमावस्या के दिन तर्पण के 3 शुभ मुहूर्त हैं।  

शुभ मुहूर्त  
कुतुप मूहूर्त - प्रातः 11:44 से दोपहर 12:30 तक 
रौहिण मूहूर्त -दोपहर 12:30 से 01:16 तक 
अपराह्न काल - दोपहर 01:16 बजे से 03:35 बजे तक 

सर्वपितृ अमावस्या पर करें इन लोगों का श्राद्ध 
पितृ पक्ष के 16 दिन तिथि अनुसार श्राद्ध किया जाता है। लेकिन सर्वपितृ अमावस्या के दिन परिवार के उन मृतक सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या तिथि पर किया गया श्राद्ध परिवार के सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करता है।  इसलिए इस दिन सभी पूर्वजों के निमित्त भी श्राद्ध करना चाहिए। इसके अलावा जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है उनका भी श्राद्ध अमावस्या में किया जाता है। परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु हुई हो उनके निमित्त भी सर्व पितृ अमावस्या के दिन तर्पण किया जा सकता है। ऐसा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए अमावस्या श्राद्ध को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है। 

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